केरल चुनाव से थरूर की दूरी, कांग्रेस में बढ़ी खींचतान

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच चल रहा मतभेद अब खुलकर सामने आने लगा है। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर हुई एक अहम बैठक में थरूर की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर बैठक में शामिल नहीं हुए, जिस पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित से सवाल किया गया। उन्होंने इस पर तीखा बयान देते हुए कहा कि जो नेता पार्टी के लिए जरूरी हैं, वे बैठक में मौजूद थे। जो अहम नहीं हैं, उनके न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
पार्टी बैठकों से बना रहे दूरी
हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार कांग्रेस की गतिविधियों से अलग नजर आ रहे हैं। केरल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस चुनावी रणनीति बनाने में जुटी है, लेकिन थरूर का इन बैठकों से दूर रहना पार्टी के भीतर बेचैनी का कारण बन गया है।
दीक्षित ने कहा कि पार्टी की बैठकों में वही नेता शामिल हो रहे हैं जिनका जनाधार मजबूत है और जिनकी जरूरत संगठन को है। उन्होंने दोहराया कि किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ता।
नेतृत्व से असंतोष के संकेत
काफी समय से यह चर्चा चल रही है कि थरूर पार्टी में अपनी भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि उन्होंने या कांग्रेस नेतृत्व ने कभी खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके बयानों से असहमति के संकेत मिलते रहे हैं।
हाल ही में थरूर ने चेतावनी दी थी कि यदि कांग्रेस ने अपना जनाधार नहीं बढ़ाया, तो पार्टी को लगातार तीसरी बार विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि केरल कांग्रेस में नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है।
थरूर ने यह तक कहा कि अगर पार्टी को उनकी जरूरत नहीं है, तो उनके पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जिनमें लेखन जैसे कार्य शामिल हैं।
एनडीए की तारीफ से बढ़ीं अटकलें
थरूर कई मौकों पर केंद्र की एनडीए सरकार की नीतियों की सराहना भी कर चुके हैं। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी उन्होंने सरकार की प्रशंसा की थी। इससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में थरूर कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।
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