बागपत: शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 4.63 करोड़ की ठगी, तीन गिरफ्तार

बागपत: देशभर में शेयर मार्केट निवेश का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के तीन सदस्य मोहित, अनुराग और विवेक कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इनको शुक्रवार रात दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर रोककर गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि गिरोह के सदस्य फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों से निवेश करवा कर उनके खाते से लाखों रुपये निकाल रहे थे।
शिकायत के बाद खुलासा
बड़ौत के कपड़ा व्यापारी मुकुल ने 23 फरवरी को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर मार्केट में निवेश कर अच्छी कमाई का लालच दिया। इसके बाद मोबाइल पर लिंक भेजकर एक ऐप डाउनलोड कराया और निवेश के नाम पर कुल 16.19 लाख रुपये उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए।
एएसपी प्रवीण कुमार चौहान ने बताया कि शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। जांच में पता चला कि मोहित अग्रवाल (सुकांता सोरानी, दार्जिलिंग), अनुराग प्रसाद (भगत सिंह रोड, सिलीगुड़ी) और विवेक कुमार गुप्ता (पट्टी चौधरान, दार्जिलिंग) इस ठगी में शामिल हैं।
गिरफ्तारी और पूछताछ
तीनों आरोपियों को शुक्रवार रात दिल्ली से देहरादून जाते समय नैथला मोड़ के पास गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मोहित ने स्वीकार किया कि वह अनुराग और विवेक के साथ मिलकर फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश करवा कर लोगों के खाते से पैसे निकालते थे। अनुराग ने कई फर्जी कंपनियों की जानकारी दी, जबकि विवेक दिल्ली से फर्जी कंपनी बनाने के लिए आया था। आरोपियों ने बताया कि निजाम, सुदीप दास और विकार शेखर पठान भी इस गिरोह में शामिल थे।
बड़े पैमाने पर ठगी और जब्ती
एएसपी ने बताया कि गिरोह ने सिर्फ दो महीने में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और पंजाब के 39 लोगों से 4.63 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपियों के पास से बाइक, आठ आईफोन, 18 एटीएम कार्ड, दो ड्राइविंग लाइसेंस, प्रिंटर, क्यूआर कोड, आधार कार्ड और फर्जी कंपनियों की मुहर समेत कई दस्तावेज बरामद किए गए।
तीनों आरोपियों को शनिवार को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। आरोपियों में मोहित आईटीआई पास हैं और दार्जिलिंग में जूते की दुकान चलाते हैं, जबकि अनुराग और विवेक कुमार 12वीं पास हैं। पुलिस ने बताया कि इन्हीं के जरिए पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था।






















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