एजेंसियों के दबाव और लालच से भाजपा तोड़ती है पार्टियां: अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा हर मुद्दे को जातीय रंग देने की कोशिश करती है और जनता को गुमराह करने में लगी रहती है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के आरक्षण को लेकर भी भाजपा की नीयत साफ नहीं है।
शनिवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण बिल लोकसभा से पारित हो चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर भाजपा गंभीर नहीं दिख रही। उनके मुताबिक, आधी आबादी से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के जरिए राजनीतिक दबाव बनाकर विपक्षी दलों को कमजोर किया जा रहा है और नेताओं को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
गाजीपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहती है और मुश्किल समय में मदद करती आई है। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने मजदूरों तक पहुंचकर आर्थिक सहायता दी थी।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा शासन में महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहीं।
चुनावी सर्वेक्षणों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने में सर्वे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मेहनत और बूथ मैनेजमेंट अहम भूमिका निभाते हैं।
इसके अलावा उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया, जहां किसानों की समस्याओं पर बात की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से किसान परेशान हैं और स्मार्ट मीटर जैसी योजनाओं का विरोध हो रहा है।
अखिलेश यादव ने भरोसा दिलाया कि यदि उनकी सरकार बनती है तो किसानों को राहत देने के लिए सब्सिडी, फसल नुकसान की भरपाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में दूध को भी एमएसपी के दायरे में लाने पर विचार किया जाएगा।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.