किसान, स्वास्थ्य और न्याय के मुद्दों पर भाकियू अराजनैतिक का बड़ा ऐलान

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसान शहीद परिवारों की पहचान और उनके सम्मान के लिए विशेष अभियान चलाने का ऐलान किया है। संगठन ने इसके लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी शुक्रवार को शाकुंतलम कॉलोनी स्थित धर्मेंद्र मलिक के आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी गई।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी ने बताया कि अभियान की शुरुआत अगले माह कर्नल राममहेश भरद्वाज के गांव रोहाना से की जाएगी, जबकि समापन शहीद-ए-आजम भगत सिंह के गांव खटकड़ कलां में होगा। इस दौरान किसान आंदोलन में शहीद हुए परिवारों से मिलकर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में भाकियू (अराजनैतिक) के चेयरमैन एवं गठवाला खाप के चौधरी बाबा राजेंद्र सिंह मलिक ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि काली, हिंडन और कृष्णा नदियां अब जीवनदायिनी नहीं रहीं, बल्कि कैंसर फैलाने का कारण बन चुकी हैं। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, शामली, गाजियाबाद, अमरोहा, हापुड़ और मुरादाबाद सहित कई जिलों में गांव-गांव कैंसर फैल रहा है। इलाज के लिए गरीब, किसान और मजदूर परिवारों को दिल्ली, चंडीगढ़ और रोहतक जाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी भी जिला अस्पताल में न तो हार्ट सर्जरी की सुविधा है और न ही उन्नत कैंसर उपचार की। आर्थिक मजबूरी के कारण कई परिवार जमीन और मकान बेचने को मजबूर हैं। भाकियू की मांग है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स स्तर का कैंसर अस्पताल, पीजीआई की स्थापना की जाए, साथ ही शामली और बिजनौर में विश्वविद्यालय खोले जाएं।
राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की बेंच स्थापना का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि न्याय के लिए लोगों को 600 किलोमीटर दूर प्रयागराज जाना पड़ता है, जिससे न्याय महंगा और कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज हाईकोर्ट पर मुकदमों का भारी दबाव है, जिससे समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं होती, तब तक मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, आगरा और अलीगढ़ मंडलों को लखनऊ बेंच से संबद्ध किया जाए।
मुजफ्फरनगर में बढ़ते प्रदूषण पर संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और संबंधित विभागों की मिलीभगत के कारण हालात बेकाबू हो चुके हैं। कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम कचरा जलाया जा रहा है, जिससे नागरिकों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं। संगठन ने इसे “स्वच्छ हवा का आपातकाल” करार दिया।
भाकियू (अराजनैतिक) ने चेतावनी दी कि यदि प्रदूषण पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो फरवरी के अंत में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठन के अनुसार, 27 से 29 जनवरी तक प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय शिविर में इन सभी मुद्दों पर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.