झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर घमासान, वार्ता के लिए पहुंचे छात्र, नहीं आए मंत्री

HIGHLIGHTS
- छात्र प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचा था।
- सरकार की ओर से गठित मंत्रियों की टीम बैठक में नहीं पहुंची।
- छात्रों ने घंटों मंत्रियों का इंतजार किया।
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को 24वें दिन भी जारी रहा। इस बीच छात्रों और सरकार के बीच प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी। सरकार की ओर से एक दिन पहले छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद आंदोलनरत छात्रों को उम्मीद थी कि वार्ता के जरिए उनकी मांगों का कोई समाधान निकल सकता है। छात्र प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचा, लेकिन सरकार की ओर से गठित मंत्रियों की टीम बैठक में नहीं पहुंची।
घंटों इंतजार के बाद बढ़ी नाराजगी
छात्र प्रतिनिधिमंडल काफी देर तक मंत्रियों का इंतजार करता रहा। बाद में वार्ता नहीं होने पर छात्रों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ गई। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सरकार को बातचीत नहीं करनी थी तो उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित क्यों किया गया।
छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनका कहना है कि सरकार का यह रवैया आंदोलन को और उग्र कर सकता है।
आंदोलन की अगली रणनीति पर होगी चर्चा
छात्र नेताओं ने कहा कि अब बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन जारी रहने के बावजूद यदि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाती है तो आंदोलन को लेकर आगे बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
राहुल गांधी की चिट्ठी से बढ़ा राजनीतिक दबाव
JPSC विवाद के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र से मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और उनके समाधान की दिशा में पहल करने की बात कही है।
CM स्तर पर मंथन, फैसले पर सस्पेंस
इसी बीच मुख्यमंत्री स्तर पर मंत्रियों के साथ मंथन की खबर से घटनाक्रम और महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोजेक्ट भवन में हुई बैठक में छात्रों की मांगों को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया गया या नहीं। फिलहाल छात्रों की नजर सरकार की अगली पहल पर है।
24 दिन से आंदोलन, सरकार के अगले कदम पर नजर
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित वार्ता क्यों नहीं हो सकी और सरकार अब छात्रों से बातचीत के लिए क्या रास्ता अपनाएगी। यदि जल्द कोई ठोस पहल नहीं हुई तो 24 दिनों से जारी यह आंदोलन आगे और तेज हो सकता है।
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