महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव? SIR के दौरान 2.07 करोड़ फॉर्म नहीं हुए जमा: रोहित पवार

HIGHLIGHTS
- महाराष्ट्र में SIR का गणना चरण 30 जून से शुरू हुआ था।
- राज्य में कुल 9.78 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज हैं।
- 69 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के फॉर्म का डिजिटलीकरण हो चुका है।
महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा नहीं हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन मतदाताओं के अनुपस्थित होने, मृत्यु हो जाने, दूसरी जगह चले जाने या नाम दोहराए जाने की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई।
राज्य में SIR का गणना चरण 30 जून से शुरू हुआ था। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 9,78,54,049 मतदाता हैं। इनमें से 7,69,52,262 मतदाताओं यानी 78.64 फीसदी के गणना फॉर्म का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
महाराष्ट्र में SIR का कितना काम बचा?
आंकड़ों के अनुसार, 2,07,93,916 मतदाताओं यानी 21.25 फीसदी के फॉर्म जमा नहीं हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इसके पीछे मतदाताओं के अनुपस्थित होने, मृत्यु होने, दूसरी जगह चले जाने या नाम दोहराए जाने जैसी वजहें हैं।
चुनाव अधिकारियों ने बताया कि SIR का डिजिटलीकरण कार्य 99.89 फीसदी पूरा हो चुका है। इसके लिए राज्यभर में 1,00,253 बूथ स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं।
महाराष्ट्र के 36 में से 14 जिलों में SIR का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है। मुंबई के दोनों जिलों में करीब 99 फीसदी काम पूरा हो गया है। एक अधिकारी के अनुसार, डिजिटलीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम आंकड़े सोमवार देर शाम या मंगलवार तक आने की उम्मीद है।
रोहित पवार ने उठाए सवाल
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने पत्रकारों से बातचीत में सवाल उठाया कि मतदाता सूची के प्रारूप से नाम हटाने का आधार क्या होगा। उन्होंने दावा किया कि जिन मतदाताओं की जानकारी अधूरी है या जिनके नाम में बदलाव हुआ है, जांच के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।
पवार ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि हटाए गए नामों में करीब 34 लाख मतदाताओं को मृत बताया गया है। करीब 76 लाख परिवारों से संपर्क नहीं हो सका, जबकि 77 लाख मतदाताओं ने अपना स्थायी पता बदल लिया है। उन्होंने दावा किया कि करीब दो लाख लोगों ने जानकारी देने से इनकार किया।
भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
पवार ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में अनुपस्थित पाए गए मतदाता भी शामिल हैं। ऐसे मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं। सत्यापन के बाद हटाए गए कुछ नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
विधायक ने यह भी दावा किया कि बूथ स्तर के अधिकारियों पर सत्यापन पूरा करने का दबाव था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर "टेबल सर्वे" किए जा रहे थे और कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से जानकारी दी जा रही थी। उन्होंने दावा किया कि पुणे, नासिक और ठाणे में ऐसे मामले सामने आए हैं।
सॉफ्टवेयर से मतदाताओं को वर्गीकृत करने का आरोप
पवार ने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से विकसित एक सॉफ्टवेयर ने मतदाताओं को उसकी विचारधारा से जुड़े, "संदिग्ध" और विरोधी मतदाताओं के रूप में वर्गीकृत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता सूची के आंकड़े मिले हैं और वह इनकी तुलना निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाली प्रारंभिक सूची से करेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि मतदाता सूची का प्रारूप संबंधित जिला प्रशासन की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। मतदाता अपना नाम जांच सकेंगे। अगर नाम सूची में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए फॉर्म 6 जमा किया जा सकेगा।
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