बीकानेर में ऊंट आधारित एंटी-स्नेक वेनम, सर्पदंश का सुरक्षित इलाज संभव

बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर में वैज्ञानिकों ने सर्पदंश के उपचार में एक अहम सफलता हासिल की है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) और एम्स जोधपुर की संयुक्त टीम ने ऊंट के खून से एंटी-स्नेक वेनम विकसित किया है। यह नई दवा पारंपरिक घोड़े के खून से बने एंटी-वेनम की जगह ले सकती है, जो अक्सर एलर्जी और गंभीर रिएक्शन का कारण बनता है।
भारत में हर साल लगभग 50 हजार लोग सर्पदंश से अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर होते हैं। वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला एंटी-वेनम घोड़े के इम्यून सिस्टम से तैयार किया जाता है, लेकिन इसके कारण मरीजों में एलर्जिक प्रतिक्रियाओं की समस्या आम है।
शोध टीम के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कौचर के अनुसार, ऊंट में मौजूद विशेष एंटीबॉडी सांप के जहर को अधिक प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकती हैं। इससे दवा के साइड इफेक्ट्स काफी कम हो जाते हैं। शोध के दौरान नियंत्रित मात्रा में सांप का जहर ऊंट के शरीर में डाला गया और उसके खून से एंटी-वेनम तैयार किया गया। चूहों पर किए गए परीक्षणों में कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखा गया। अब मानव क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
यह उपलब्धि खासकर थार डेजर्ट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसे जहरीले सांप आम हैं। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की MRU यूनिट पिछले 15 वर्षों से सर्प विष पर रिसर्च कर रही है और 65 से अधिक बीमारियों पर सफल शोध कर चुकी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऊंट आधारित यह एंटी-वेनम सस्ता, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इससे ग्रामीण भारत में सर्पदंश से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। साथ ही, ऊंट पालक किसानों के लिए यह नई आय का स्रोत भी बन सकता है।
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