अवैध धर्मांतरण रैकेट पर शिकंजा: ईदुल इस्लाम से पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव

हिंदू युवतियों और महिलाओं के कथित अवैध धर्मांतरण से जुड़े छांगुर पीर नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच अब अहम चरण में पहुंच गई है। इस मामले में ईदुल इस्लाम की गिरफ्तारी के बाद एटीएस को पूरे रैकेट की परतें खुलने की उम्मीद है। एजेंसी उसे नेटवर्क की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है और उससे गहन पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर से हुई पूछताछ में नेटवर्क की फंडिंग, ढांचे और संचालन को लेकर सीमित जानकारी ही मिल सकी थी। हालांकि, ईदुल इस्लाम की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को विश्वास है कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली स्पष्ट हो सकेगी।
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि छांगुर पीर जहां जमीनी स्तर पर गतिविधियों को अंजाम देता था, वहीं ईदुल इस्लाम नेटवर्क खड़ा करने और उसे विस्तार देने की भूमिका निभा रहा था। संगठनात्मक ढांचा तैयार करना, विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से वैचारिक प्रसार, आर्थिक संसाधनों की व्यवस्था और पूरे नेटवर्क के संचालन की जिम्मेदारी उसी के पास थी।
एटीएस अब तकनीकी जांच पर भी पूरा फोकस कर रही है। ईदुल इस्लाम के मोबाइल फोन, ई-मेल अकाउंट, क्लाउड डेटा और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स की फॉरेंसिक जांच की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि डिजिटल साक्ष्यों से नेटवर्क से जुड़े अन्य सक्रिय सदस्यों, संपर्कों और फंडिंग के रास्तों की अहम जानकारी सामने आ सकती है।
इसके साथ ही जांच एजेंसियों की नजर विदेशी फंडिंग पर भी टिकी है। शुरुआती संकेत मिले हैं कि इस कथित धर्मांतरण रैकेट को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही थी, जिसे अलग-अलग संस्थाओं और खातों के जरिए भारत तक पहुंचाया जाता था। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फंड किन देशों से आया, किसके माध्यम से भेजा गया और उसका उपयोग किन गतिविधियों में किया गया।
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