कानपुर में साइबर ठगी, IAS अधिकारी के पिता के खाते से 6.12 लाख उड़ाए

कानपुर में आईएएस अधिकारी राजीव सिंह के पिता पारस नाथ सिंह के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि उनके बैंक खाते से करीब 6.12 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। पीड़ित ने तीन दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान मामला तब और आगे बढ़ा जब शुक्रवार को एक संदिग्ध व्यक्ति पनकी थाने पहुंचा और अपने बैंक खाते के बंद होने की शिकायत की। पुलिस ने जब उसके खाते की जांच की तो उसमें ठगी की रकम का लेनदेन पाया गया। पूछताछ में उसने कई अन्य लोगों के नाम उजागर किए, जिसके बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।
कैसे हुआ पूरा खेल
पुलिस के अनुसार, पारस नाथ सिंह के दो बेटे हैं, जिनमें से एक आईएएस अधिकारी और दूसरा आरबीआई में कार्यरत है। उनकी देखभाल के लिए पहले प्रियांशु नामक युवक रखा गया था, जो बाद में काम छोड़कर चला गया। इसके बाद फतेहपुर निवासी राज ठाकुर को केयरटेकर के रूप में रखा गया।
राज ठाकुर की पहचान पनकी के विशाल मिश्रा और सागर से थी, जबकि सागर के संपर्क में आगे अन्य लोग—आकाश, रोहित और योगेश—भी जुड़े हुए थे। आरोप है कि इसी नेटवर्क के जरिए बैंक खातों का इस्तेमाल कर पैसे की हेराफेरी की गई।
खाते से कैसे निकली रकम
पारस नाथ सिंह को तब ठगी का पता चला जब उनके खाते से अचानक पैसे कम होने लगे। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर सामने आया कि मार्च में खेती से आए करीब 2.5 लाख रुपये सहित कुल 6.12 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए हैं।
इसके बाद परिवार ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। साइबर सेल और नौबस्ता पुलिस ने जांच शुरू करते हुए कई संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराया।
जांच में बड़ा खुलासा
जांच के दौरान एक खाता योगेश के नाम पर सामने आया। जब वह पनकी थाने पहुंचा, तो पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसने बताया कि उसके खाते में पैसे सागर के कहने पर ट्रांसफर कराए गए थे। इसके बाद पुलिस ने राज ठाकुर, विशाल मिश्रा और सागर को हिरासत में ले लिया।
कमीशन का खेल भी सामने आया
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, सागर कथित तौर पर लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराता था और हर ट्रांजैक्शन पर करीब 10 हजार रुपये कमीशन लेता था। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के नेटवर्क और अन्य खातों की भूमिका की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित तरीके से चलाया जा रहा ठगी का नेटवर्क हो सकता है, जिसमें कई और लोग शामिल हो सकते हैं। मामले की गहन जांच जारी है।
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