दिल्ली सरकार की नई SOP: 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों का डिजिटल नियमितिकरण

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार राजधानी की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को जल्द ही नियमित करने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रही है। इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए हर जिले में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) की अध्यक्षता में विशेष सेल का गठन किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को नई नीति की घोषणा की, जिसके तहत कॉलोनियों को “जहां है, जैसा है” के आधार पर नियमित किया जाएगा। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन संचालित होगी, जिसमें राजस्व विभाग और दिल्ली नगर निगम (MCD) मिलकर काम करेंगे। पहले यह जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की थी।
मालिकाना हक पाने की प्रक्रिया:
- आवेदन: संपत्ति मालिक 24 अप्रैल से MCD के स्वगम पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे।
- दस्तावेज: राजस्व विभाग “कन्वेयंस डीड” और “अधिकृत पर्ची” जारी करेगा, जिसके आधार पर MCD नियमितिकरण प्रमाणपत्र देगा।
- पंजीकरण: प्रमाणपत्र मिलने के बाद मालिक एनजीडीआरएस पोर्टल पर अपनी संपत्ति का पंजीकरण कर पाएंगे।
- नोडल अधिकारी: 13 जिलों के एडीएम नोडल अधिकारी होंगे, और प्रत्येक जिले में 5-6 कर्मचारियों की टीम आवेदनों का निपटारा करेगी।
निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक:
अनधिकृत निर्माण को रोकने के लिए MCD हर दो महीने में एआई-आधारित ड्रोन सर्वे करेगा।
कौन नहीं मिलेगा लाभ:
दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से केवल 1,511 कॉलोनियों को ही इस नई नीति का लाभ मिलेगा। शेष 220 कॉलोनियों को नीति से बाहर रखा गया है क्योंकि वे संरक्षित वन क्षेत्र, रिज़, यमुना खादर, ऐतिहासिक स्मारकों के पास या संपन्न क्षेत्र में स्थित हैं।
सरकार का मानना है कि लेआउट प्लान की अनिवार्यता हटने और ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से लाखों संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
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