मतदाता सूची का एसआईआर कराना ईसी का संवैधानिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराना न केवल उसके अधिकार क्षेत्र में आता है, बल्कि यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है। आयोग ने कहा कि यह सुनिश्चित करना उसका दायित्व है कि कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल न हो। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने यह पक्ष मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई दोबारा शुरू की है, जिनमें बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर कराए जाने के चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता की जांच और मतदान के अधिकार से जुड़े संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि संविधान के तहत राज्य के तीनों अंगों से जुड़े सभी प्रमुख संवैधानिक पदों पर केवल भारतीय नागरिक ही नियुक्त हो सकते हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 124(3) का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति में भी नागरिकता अनिवार्य शर्त है।
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पदों पर आसीन होने के लिए भारतीय नागरिक होना मूल योग्यता है। द्विवेदी ने जोर देते हुए कहा कि संविधान की मूल भावना नागरिक-केंद्रित है और जब संविधान ‘नागरिक’ शब्द का प्रयोग करता है, तो उसकी जांच सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया जाना जरूरी है।
आयोग की भूमिका स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व राजनीतिक दलों के आरोपों या बयानों का जवाब देना नहीं है। उनका कहना था कि आयोग का उद्देश्य केवल इतना है कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध रहे और उसमें किसी विदेशी नागरिक का नाम दर्ज न हो।
दलील के दौरान उन्होंने एक अहम संवैधानिक सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या संविधान का अनुच्छेद 324, जो चुनाव आयोग को चुनावों के संचालन, दिशा और नियंत्रण की शक्ति देता है, किसी कानून के प्रावधान से पूरी तरह समाप्त हो सकता है या इसे प्रत्येक स्थिति में अलग-अलग परखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 को एक साथ पढ़ने पर यह नहीं कहा जा सकता कि मतदाता सूची में संशोधन के मामलों में चुनाव आयोग के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए आयोग के संवैधानिक अधिकार बरकरार रहते हैं।
एसआईआर को लेकर टीएमसी सांसद का सुप्रीम कोर्ट में आवेदन
इधर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कथित मनमानी और प्रक्रिया संबंधी खामियों का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है।
आवेदन में कहा गया है कि चुनाव आयोग न तो मनमाने ढंग से काम कर सकता है और न ही कानून में तय प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर किसी अस्थायी या अनौपचारिक व्यवस्था को लागू कर सकता है। डेरेक ओ’ब्रायन ने पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में एसआईआर कराने से जुड़े चुनाव आयोग के आदेशों और दिशा-निर्देशों को चुनौती दी है।
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