प्रयागराज में हनुमंत कथा: धीरेंद्र शास्त्री बोले– हनुमान जी के मार्ग पर चलना जरूरी

HIGHLIGHTS
- प्रयाग उत्थान समिति द्वारा संगम नगरी के अरैल क्षेत्र में आयोजित राष्ट्र हनुमंत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सुंदरकांड का विस्तार से भावपूर्ण वर्णन किया।
- इस दौरान उन्होंने कहा कि हनुमान जी के चरित्र से यह स्पष्ट होता है कि जो श्रीराम का विरोध करता है, वह हनुमान जी का भी विरोधी माना जाता है।
- उन्होंने आगे कहा कि हनुमान जी ने जिस तरह लंका में जाकर साहस और शक्ति का प्रदर्शन किया था, उसी प्रकार समाज को भी राष्ट्रहित और धर्म के प्रति जागरूक होकर गलत विचारधाराओं का सामना…
प्रयाग उत्थान समिति द्वारा संगम नगरी के अरैल क्षेत्र में आयोजित राष्ट्र हनुमंत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सुंदरकांड का विस्तार से भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हनुमान जी के चरित्र से यह स्पष्ट होता है कि जो श्रीराम का विरोध करता है, वह हनुमान जी का भी विरोधी माना जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि हनुमान जी ने जिस तरह लंका में जाकर साहस और शक्ति का प्रदर्शन किया था, उसी प्रकार समाज को भी राष्ट्रहित और धर्म के प्रति जागरूक होकर गलत विचारधाराओं का सामना करना चाहिए।
मूल मार्ग से भटकने का संदेश
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज का मनुष्य अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और ‘हरि भजन को ओटन लगे कपास’ जैसी स्थिति में फंस गया है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने मूल सिद्धांतों से दूर हो जाएगा तो न तो जीवन सफल होगा और न ही सही मंजिल प्राप्त हो सकेगी।
उन्होंने हिंदू राष्ट्र के विचार को दोहराते हुए कहा कि जब भी हिंदू जागरण की बात की जाती है, तो कुछ लोग इसका विरोध करते हैं, जबकि उद्देश्य केवल सोए हुए समाज को जागरूक करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में विडंबना यह है कि हिंदू ही कहीं-कहीं एक-दूसरे के विरोध में खड़ा नजर आता है, जो चिंता का विषय है।
दिव्य दरबार में श्रद्धालुओं की अर्जियां और भक्ति का माहौल
मुख्य कथा से पहले शाम 4 बजे से 7 बजे तक दिव्य दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से आए श्रद्धालुओं की समस्याएं और अर्जियां सुनी गईं।
इस अवसर पर भजन गायक हंसराज रघुवंशी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिन पर पूरा पंडाल भक्ति भाव में झूम उठा। समिति के प्रवक्ता राजेश केसरवानी ने बताया कि मुख्य संयोजक डॉ. उदय प्रताप सिंह ने विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।
समापन दिवस पर कई विशिष्ट हस्तियों की उपस्थिति
तीन दिवसीय हनुमंत कथा के अंतिम दिन टीवी धारावाहिक महाभारत में श्रीकृष्ण की भूमिका निभा चुके अभिनेता नीतीश भारद्वाज भी शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में रामायण के आदर्शों को अपनाए और मर्यादा के मार्ग पर चले, तो घर और जीवन में कलह की स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि महाराज, कथावाचक महंत श्याम सुंदर पराशर सहित कई संतों ने भी सहभागिता की। मुख्य यजमान डॉ. उदय प्रताप सिंह ने परिवार सहित आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महापौर गणेश केसरवानी, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, उदय भान करवरिया, नीरज त्रिपाठी, कुमार नारायण, राजेश केसरवानी, अनुराग सिंह और अभिषेक ठाकुर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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