एम्स में हरीश राणा सामान्य बेड पर शिफ्ट, इच्छामृत्यु प्रक्रिया जारी

गाजियाबाद निवासी हरीश राणा, जिन्हें इच्छामृत्यु के तहत एम्स में भर्ती कराया गया है, को बुधवार को वेंटिलेटर और जीवनरक्षक उपकरण से हटाकर सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है।
चरणबद्ध तरीके से जीवनरक्षक प्रणाली बंद की जा रही है
सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों हरीश की पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई थी और फीडिंग ट्यूब पर कैप लगा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उनके मेडिकल बोर्ड का विस्तार किया गया है। पहले पांच सदस्यों वाला बोर्ड अब दस सदस्यों का हो गया है। डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के पेट में लगी कृत्रिम पोषण ट्यूब को बंद किया गया है, लेकिन आवश्यक दवाइयां जारी हैं।
डॉक्टरों का कहना
एम्स के डॉक्टरों ने कहा कि यह प्रक्रिया मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार और विशेषज्ञों की राय के आधार पर की जा रही है। हरीश के अंगों की स्थिति का परीक्षण भी जारी है ताकि अंगदान के लिए अंतिम निर्णय लिया जा सके। अस्पताल प्रशासन परिवार की काउंसलिंग पर भी ध्यान दे रहा है।
मनोचिकित्सकों की टीम रोजाना हरीश के माता-पिता और भाई से बात करती है। उनकी मां ज्यादातर समय उनके पास रहती हैं, जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर उनसे मिलते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु की प्रक्रिया में समय का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
पैलिएटिव केयर में मरीज की गरिमा और आराम पर फोकस
डॉक्टरों के अनुसार, पैलिएटिव केयर वार्ड में कुल छह बेड हैं। इस वार्ड में मृत्यु को तेज नहीं किया जाता, बल्कि मरीज के दर्द और तकलीफ को कम करके प्राकृतिक तरीके से मरने की अनुमति दी जाती है।
विशेष मेडिकल टीम कर रही निगरानी
इस प्रक्रिया के लिए डॉ. सीमा मिश्रा की अध्यक्षता में विशेष टीम बनाई गई है, जिसमें एनेस्थीसिया, न्यूरो सर्जरी, ऑनको-एनेस्थीसिया, पैलिएटिव मेडिसिन और मनोरोग विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम हर कदम सावधानी से उठाती है और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपती है।
अंगदान की तैयारी
हरीश के माता-पिता ने अंगदान का फैसला लिया है। एम्स की मेडिकल टीम ने हरीश के अंगों की पूरी जांच शुरू कर दी है। इसमें किडनी, दिल, पैंक्रियास, आंतें, कॉर्निया और हार्ट वाल्व शामिल हैं। प्रारंभिक जांच के बाद तय किया जाएगा कि कौन से अंग सुरक्षित रूप से ट्रांसप्लांट के लिए निकाले जा सकते हैं।
हरीश राणा का मामला
हरीश ने जुलाई 2010 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी। अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन वह बहन से मोबाइल पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में दिसंबर 2013 में उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया का निदान हुआ, जिसके कारण उनके हाथ-पैर निष्क्रिय हो गए और वे जीवनभर बिस्तर पर रहने को मजबूर हैं।
हरीश के माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु के लिए अपील की थी, जिसे 8 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और 11 मार्च 2026 को अदालत ने हरीश को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.