हरियाणा का पहला पेपरलेस रजिस्ट्री फ्रॉड, करोड़ों की जमीन फर्जी तरीके से बेची

सोनीपत। प्रदेश में 1 नवंबर से लागू किए गए पेपरलेस रजिस्ट्री सिस्टम को पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन गन्नौर तहसील में सामने आए एक बड़े फर्जीवाड़े ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां दिल्ली की एक रियल एस्टेट कंपनी की करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की साढ़े चार एकड़ जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिर्फ 6.16 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि असली मालिक को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह सौदा जाली अथॉरिटी लेटर और नकली पहचान पत्रों के सहारे किया गया। रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल विक्रेता, खरीदार, गवाह और नंबरदार—सभी के कागजात संदिग्ध पाए गए, लेकिन इसके बावजूद नायब तहसीलदार ने रजिस्ट्री को मंजूरी दे दी। करीब डेढ़ महीने बाद मामला उजागर हुआ तो उसे दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं।
ऐसे हुआ खुलासा
दिल्ली के शालीमार बाग निवासी बिकास पाड़िया ने 12 जनवरी को गन्नौर एसीपी को शिकायत देकर बताया कि उनकी कंपनी सपाज एस्टेट प्रा. लि. के नाम वर्ष 2011 से गन्नौर बाय रोड पर 36 कनाल जमीन दर्ज है। इस जमीन की देखरेख उनके परिचित मुकेश जैन करते हैं।
10 जनवरी को मुकेश जैन को सूचना मिली कि उनकी जमीन की किसी और के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। तहसील में जांच कराने पर पता चला कि नसीरपुर बांगर निवासी प्रमोद कुमार ने कंपनी का फर्जी अथॉरिटी लेटर बनवाकर खुद को अधिकृत बताकर यह जमीन जींद के पिल्लूखेड़ा निवासी बलबीर सिंह के नाम बेच दी।
रजिस्ट्री में गवाह और नंबरदार भी संदेह के घेरे में
27 नवंबर को हुई रजिस्ट्री में गोहाना के बरौदा निवासी प्रवीन कुमार को गवाह और गांव बाय निवासी रविंद्र को नंबरदार दिखाया गया। जांच में सामने आया कि रविंद्र के दस्तावेजों में लिंग संबंधी विरोधाभास है—फोटो में पुरुष और रिकॉर्ड में महिला दर्शाई गई है। इसके अलावा दोनों गवाहों के मोबाइल नंबरों में सिर्फ अंतिम अंक का अंतर है, जिससे संदेह और गहराता है।
कागजों में भी बड़ी गड़बड़ी
दस्तावेजों में दर्शाया गया है कि अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच पांच बार आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर हुई। इसके बाद 27 नवंबर को 61.68 लाख रुपये के स्टांप पर रजिस्ट्री की गई। खरीदार बलबीर सिंह ने भी कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड लगाया, जिसमें जन्मतिथि अधूरी है, जबकि पैन कार्ड में अलग तारीख दर्ज है।
न रजिस्ट्री रद्द, न जांच समिति
मामले के सामने आने के बावजूद न तो रजिस्ट्री रद्द की गई और न ही जिला प्रशासन ने कोई जांच समिति गठित की। नायब तहसीलदार अमित कुमार ने विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र लिखा, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस पर प्रभावशाली लोगों के दबाव की चर्चा भी सामने आ रही है।
पहले भी हो चुका है ऐसा
गौरतलब है कि गन्नौर तहसील में दो साल पहले भी एक नायब तहसीलदार द्वारा बिना एनओसी के एक ही दिन में 84 रजिस्ट्रियां करने का मामला सामने आया था, जिसमें अधिकारी को निलंबित किया गया था।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
न्याय युद्ध संस्था के संस्थापक देवेंद्र गौतम ने पूरे प्रकरण को संगठित गिरोह की करतूत बताया है। उनका कहना है कि एफआईआर न होना और रजिस्ट्री रद्द न किया जाना सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
अधिकारियों के बयान
अमित कुमार, नायब तहसीलदार:
“रजिस्ट्री के समय दस्तावेज सही प्रतीत हो रहे थे। बाद में जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया है। हमने विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखा है।”
ऋषिकांत, एसीपी गन्नौर:
“मामले की जांच की जाएगी। किसी तरह का दबाव नहीं है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।”
विपुल गोयल, राजस्व मंत्री (हरियाणा):
“पूरा मामला गंभीर है। ऑफिस खुलते ही रिपोर्ट मांगी जाएगी। पेपरलेस सिस्टम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
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