किसानों का पैसा रोका तो देना होगा 12% ब्याज: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कई अहम संकेत दिए हैं। राजधानी में स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में आयोजित तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के आर्थिक हितों से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
भुगतान में देरी पर सख्ती
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी एजेंसी या राज्य स्तर पर किसानों का भुगतान रोका गया तो संबंधित पक्ष को बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार अपनी ओर से दी जाने वाली राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की दिशा में काम कर रही है, ताकि भुगतान प्रक्रिया में देरी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त की जा सके।
उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव के संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि सालाना दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की खाद सब्सिडी को भी सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर करने पर विचार चल रहा है, जिससे वास्तविक किसानों को सीधा फायदा मिल सके।
एमएसपी खरीद और सस्ता कर्ज
फसलों की खरीद प्रक्रिया को तेज करने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली खरीद अधिकतम एक महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए। वर्तमान में इसमें लगने वाले समय को कम करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत मिलने वाले 4 प्रतिशत ब्याज दर वाले ऋणों के वितरण में भी शून्य देरी सुनिश्चित करने की बात कही। बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
लाइसेंसिंग और अनुसंधान में सुधार
कृषि इनपुट की गुणवत्ता सुधारने के लिए कीटनाशक लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे ईमानदार कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और नकली उत्पादों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्रों को जिला स्तर पर ‘कृषि सुधार कमांड सेंटर’ के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि शोध और खेत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। इस अवसर पर कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी मौजूद रहे।
‘लैब से खेत’ तक अभियान
सरकार आगामी खरीफ सत्र से पहले अप्रैल में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ शुरू करेगी। इस पहल के तहत वैज्ञानिक सीधे गांवों में पहुंचकर किसानों को नई तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों की जानकारी देंगे, जिससे आधुनिक खेती को बढ़ावा मिल सके।
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