बिहार में बादलों ने रोकी चांद की राह, मोबाइल पर तस्वीर देखकर महिलाओं ने खोला व्रत

HIGHLIGHTS
- महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखकर करवा माता की पूजा की।
- गुरुद्वारा रोड, धामीटोला मंदिर और विष्णुपद क्षेत्र में दिखी पर्व की रौनक।
- बादल छाए रहने से चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके।
गयाजी: पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा। महिलाओं ने पूरे रीति-रिवाज और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना की।
सुबह से ही महिलाओं में करवाचौथ को लेकर उत्साह देखने को मिला। सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने दिनभर निर्जला उपवास रखा। करवा माता की पूजा करने के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने की तैयारी की गई, लेकिन आसमान में बादल छाए रहने के कारण चंद्रदेव के दर्शन नहीं हो सके।
शहर के गुरुद्वारा रोड, धामीटोला मंदिर, विष्णुपद क्षेत्र और रामपुर मोहल्ले समेत कई इलाकों में करवाचौथ की पारंपरिक रौनक देखने को मिली। दिन में महिलाओं ने व्रत कथा सुनी और एक-दूसरे को तिलक लगाकर मंगलकामनाएं दीं। शाम होते ही सजधजकर महिलाएं पूजा की थाली लेकर छतों पर चंद्रमा के निकलने का इंतजार करती रहीं।
पति का चेहरा देखकर खोला व्रत
महिलाओं ने चलनी से अपने पति का चेहरा देखकर व्रत पूरा किया। इसके बाद पति ने अपने हाथों से पानी पिलाकर पत्नी का उपवास खुलवाया।
स्नेहा शर्मा ने बताया कि गयाजी में चंद्रमा दिखाई नहीं दिया। तूफान के कारण आसमान में बादल छाए हुए थे। उन्होंने दिल्ली और हरियाणा समेत अन्य स्थानों पर रहने वाले परिजनों से मोबाइल पर चंद्रमा की तस्वीर मंगवाई और उसे देखकर अपना व्रत खोला।
करवाचौथ केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। इस बार कई नवविवाहित महिलाओं ने भी पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा। उनके बीच पर्व को लेकर खास उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। यह त्योहार वैवाहिक रिश्ते को मजबूत बनाने का अवसर भी देता है।
पंजाबी समाज में दिखा उत्साह, अन्य समुदायों की महिलाओं ने भी निभाई परंपरा
पंजाबी समाज के अंकुश बग्गा ने बताया कि पंजाबी समाज में करवाचौथ का पर्व बड़े उत्साह और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं लाल और गुलाबी रंग की साड़ी या लहंगा पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। अब अन्य समुदायों की महिलाएं भी इस व्रत को आस्था और प्रेम के साथ निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह पर्व अखंड सौभाग्य और अटूट विश्वास का प्रतीक है। वहीं, पूजा कुमारी अटघरा, खुशबू भदानी और हेमा लोहानी ने बताया कि करवाचौथ का व्रत सिर्फ पति की लंबी उम्र की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और आपसी विश्वास बनाए रखने का भी प्रतीक है।
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