करवा चौथ पर शिमला के रिज मैदान में जुटीं सुहागिनें, बादलों के बीच किया चांद का दीदार

HIGHLIGHTS
- रिज मैदान पर शाम करीब 7:30 बजे से विवाहित जोड़ों का पहुंचना शुरू हो गया था।
- रात 8:05 बजे के करीब केलस्टन क्षेत्र की ओर चांद दिखाई दिया।
- पंजाब से आए नवविवाहित जोड़े ने शिमला में सैकड़ों महिलाओं के साथ व्रत खोलने के अनुभव को खास बताया।
करवा चौथ के पर्व पर गुरुवार को हिमाचल प्रदेश के बाजारों में दिनभर रौनक बनी रही। सुबह से ही खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जो देर शाम तक जारी रही। वहीं, शाम को चांद निकलने के बाद सुहागिनों ने अपना व्रत खोला।
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर महिलाएं सज-धजकर चांद के दीदार के लिए पहुंचीं। रात को चांद दिखने के बाद सैकड़ों महिलाओं ने एक साथ अपने पतियों के हाथों से पानी पीकर व्रत खोला। रिज मैदान पर शाम करीब 7:30 बजे से ही विवाहित जोड़ों का पहुंचना शुरू हो गया था। इस दौरान पुलिस जवान भी गश्त करते नजर आए।
दिनभर मौसम खराब रहने के कारण महिलाओं को चांद दिखाई देने को लेकर चिंता बनी रही। बादलों के बीच चांद के दर्शन हो पाएंगे या नहीं, इसे लेकर महिलाएं बेसब्री से इंतजार करती रहीं।
खराब मौसम के कारण चांद देखने के लिए करना पड़ा इंतजार
रात करीब 8:05 बजे केलस्टन क्षेत्र की ओर से हल्के बादलों के बीच चांद दिखाई दिया। इसके बाद महिलाएं छलनी, थाली और पानी का लोटा लेकर व्रत खोलने के लिए अलग-अलग जगहों पर खड़ी हो गईं। हालांकि, बादलों के कारण चांद साफ नजर नहीं आया, जिससे महिलाओं को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक जोड़ों ने भी रिज मैदान पर छलनी से चांद देखकर करवा चौथ की पूजा की। इस दौरान कई बुजुर्ग दंपती भी व्रत खोलने के लिए मैदान पहुंचे थे।
पंजाब से आए नवविवाहित दंपती सिमरन कौर और रोहन सिंह ने बताया कि उन्होंने एक महीने पहले ही करवा चौथ के लिए शिमला आने की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा कि यहां सैकड़ों महिलाओं को एक साथ व्रत खोलते देखना बेहद अद्भुत अनुभव है।
कृष्णानगर में निभाई गई थाली घुमाने की रस्म
सुहागिनों ने अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए 13 से 14 घंटे तक निर्जला व्रत रखा। सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक उपवास करने के बाद महिलाओं ने पतियों के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण किया।
इससे पहले सुबह महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी ग्रहण की। सूर्योदय के बाद शिव परिवार और करवा माता की पूजा-अर्चना कर व्रत शुरू किया। शाम को शुभ मुहूर्त के अनुसार 5:38 बजे से 6:56 बजे के बीच घरों में करवा पूजा की गई। चांद निकलने के बाद व्रत खोला गया।
इसके बाद महिलाओं ने पांच थाली बांटने की रस्म निभाई। उन्होंने अपनी सास, जेठानी और ननदों के लिए रखा गया बायना (करवा) देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
राजधानी के कृष्णानगर क्षेत्र में भी करवा चौथ के अवसर पर थाली घुमाने की रस्म आयोजित हुई। शाम को व्रत रखने वाली महिलाएं एक जगह एकत्रित हुईं और समूह में बैठकर यह परंपरा निभाई। इस दौरान छलनी, थाली, पानी का लोटा और सुहाग का सामान एक-दूसरे को दिया गया। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनाई गई।
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