पड़ोसी राज्यों के न्यायाधीश भी बंगाल SIR प्रक्रिया में करेंगे मदद: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता पहचान प्रक्रिया (एसआईआर) को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट लगातार सख्त और व्यापक निर्देश जारी कर रही है। शुरुआती आदेशों में राज्य के न्यायिक अधिकारियों को तार्किक विसंगतियों और अनमैप्ड नामों की जांच के लिए नियुक्त किया गया था।
हालांकि, लगभग 5 लाख नामों की जांच के लिए राज्य के न्यायिक अधिकारियों की संख्या पर्याप्त नहीं पाई गई। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने अब पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को भी तैनात करने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया गया कि वे तीन वर्ष या उससे अधिक अनुभव वाले सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन) को भी जांच के लिए तैनात कर सकते हैं।
डिजिटल और फिजिकल दस्तावेज़ मान्य होंगे
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में केवल मान्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे। इसमें माध्यमिक (कक्षा दस) का एडमिट कार्ड, प्रमाणपत्र और आधार कार्ड को मान्यता दी जाएगी। 14 फरवरी 2026 से पहले जमा किए गए दस्तावेज ही जांच के लिए गिने जाएंगे।
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होगी
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होगी, लेकिन जांच पूरी न होने पर चुनाव आयोग को इसके बाद भी पूरक सूचियां जारी करने की अनुमति होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन पूरक सूचियों को भी अंतिम मतदाता सूची का हिस्सा माना जाएगा।
जांच में 80 दिन का समय अनुमानित
पीठ ने कहा कि करीब 5 लाख नामों की जांच के लिए अब तक 250 जिला और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक अधिकारी प्रतिदिन 250 मामलों की जांच करेगा, ऐसे में पूरी प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लगेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने समय और अधिकारियों की कमी को ध्यान में रखते हुए न्यायिक अधिकारियों के दायरे को बढ़ा दिया है।
पड़ोसी राज्यों से सहयोग की अनुमति
यदि हाई कोर्ट को और अधिकारियों की आवश्यकता महसूस होती है तो वे झारखंड और ओडिशा के हाई कोर्ट प्रमुखों से संपर्क कर वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद ले सकते हैं। इन अधिकारियों के यात्रा और ठहरने का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।
जिम्मेदारी ERO और AERO पर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में उपयोग किए गए दस्तावेजों की वैधता और पुष्टि की जिम्मेदारी ईआरओ और एईआरओ पर होगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.