शराब घोटाला मामला: अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सीबीआई को नोटिस

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को शराब नीति मामले में सुनवाई से हटाने की मांग की। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
केजरीवाल की अर्जी और सीबीआई का रुख
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शराब नीति मामले में केजरीवाल और अन्य सभी आरोपियों की बरी होने की निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की अर्जी को रिकॉर्ड पर लिया और सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित की। मामले में CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए।
मेहता ने कहा कि अदालत नाटक का मंच नहीं है और केजरीवाल की अर्जी तुच्छ तथा अवमाननापूर्ण है। उन्होंने बताया कि सात अन्य बरी किए गए आरोपियों ने भी जज को हटाने की मांग की है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर कोई और अर्जी देना चाहता है, तो वह दे सकता है, ताकि सभी मामलों पर एक साथ निर्णय लिया जा सके।
निचली अदालत का फैसला
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका दावा न्यायिक जांच में टिकने योग्य नहीं है और पूरी तरह अविश्वसनीय पाया गया।
इसके बाद 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय ने केजरीवाल के अनुरोध को पहले ही खारिज कर दिया था और कहा था कि जज को हटाने का निर्णय संबंधित जज को ही लेना होता है।
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