JPSC परीक्षा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 24 अगस्त को होगी सुनवाई; परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट 24 अगस्त को जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा।
- याचिका में 19 अप्रैल 2026 को हुई 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का जिक्र है।
- एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने का दावा किया गया।
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या स्वतंत्र जांच का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका (पीआईएल) पर सर्वोच्च अदालत 24 अगस्त, सोमवार को सुनवाई करेगी।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है। इसमें परीक्षा रद्द कर नई परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिका में परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही 19 अप्रैल 2026 को हुई 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।
यह याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद सामने आए विवाद के बीच दायर की गई। याचिका के अनुसार, एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हुई थी, जिसके बाद मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठे। इन कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। याचिकाकर्ता का दावा है कि प्रथम पेपर में 100 प्रश्नों में से केवल 48 प्रश्नों का उत्तर देने के बावजूद उम्मीदवार को सफल घोषित किया गया।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की मांग
याचिका में झारखंड से बाहर के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश अथवा न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने ओएमआर स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने वाली प्रणालियों के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग की है।
भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक परीक्षा दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में जेपीएससी, सरकारी अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी एजेंसियों, ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं तथा परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों को सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक परीक्षा दस्तावेज सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।
इन अभिलेखों में मूल ओएमआर शीट, उम्मीदवारों की कार्बन कॉपी, प्रश्न पत्र, उत्तर कुंजी, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, प्रेषण रजिस्टर, परीक्षा केंद्र रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और परिणाम तैयार करने से जुड़ा डेटा समेत अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल करने की मांग की गई है।
अदालत की निगरानी में नई परीक्षा कराने की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से न्यायालय द्वारा मंजूर सुरक्षा उपायों के तहत नई प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करने का आदेश देने का आग्रह किया है।
वहीं, झारखंड हाई कोर्ट ने 20 अगस्त को राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं के जरिए भर्ती किए गए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द की गई थी।
18 अगस्त को झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ कई सप्ताह से चल रहे जन विरोध के बाद 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। हाई कोर्ट का यह आदेश नवनियुक्त अधिकारियों की ओर से सरकार के इस फैसले के खिलाफ दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.