मुजफ्फरनगर कोर्ट का बड़ा फैसला, 12 साल पुराने हत्याकांड में चार दोषियों को फांसी की सजा

HIGHLIGHTS
- 14 जुलाई 2014 को भभीसा गांव में घर में घुसकर हुई थी फायरिंग।
- वारदात में पवन कुमार की गोली लगने से मौत हुई थी।
- हमलावरों के निशाने पर पवन के बड़े भाई अशोक कुमार थे।
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर कोर्ट ने घर में घुसकर हत्या करने के 12 साल पुराने मामले में चार बदमाशों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चारों दोषियों पर कुल 1.70 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसला बुधवार को सुनाया गया।
मामला 14 जुलाई 2014 को शामली के भभीसा गांव का है। हथियारों से लैस बदमाश पवन कुमार के घर में घुसे और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों के निशाने पर पवन के बड़े भाई अशोक कुमार थे। अशोक बदमाशों से बचने के लिए कमरे में छिप गए। इसके बाद बदमाशों ने पवन कुमार को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में अशोक भी घायल हुए थे।
इस मामले में मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी भी नामजद था। 25 जुलाई 2026 को पुलिस एनकाउंटर में वह बागपत में मारा गया। इसके बाद मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
कोर्ट ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ मानते हुए रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ घोसी और हरेंद्र को हत्या का दोषी माना और चारों को फांसी की सजा सुनाई।
अशोक को मारने पहुंचे थे बदमाश, भाई पवन की हत्या
14 जुलाई 2014 को शामली के भभीसा गांव में कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी अपने साथियों के साथ हथियारों से लैस होकर पवन कुमार (65) के घर में घुसा था। बदमाशों के निशाने पर पवन के बड़े भाई अशोक कुमार थे। बदमाशों को देखकर अशोक कमरे में छिप गए।
इसके बाद बदमाशों ने घर में ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अशोक कुमार भी घायल हुए। वारदात के बाद सभी बदमाश फरार हो गए।
12 साल तक चला हत्याकांड का केस
घरवालों की शिकायत पर विपुल उर्फ खूनी समेत उसके साथी रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में सभी आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। करीब 12 साल तक यह केस कोर्ट में चलता रहा।
25 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी विपुल उर्फ खूनी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। इसके बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में जारी रही। कोर्ट ने अब चार आरोपियों रामवीर, राजीव, राहुल और हरेंद्र को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
पुरानी रंजिश के चलते की गई हत्या
पवन कुमार के परिवार और कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की मां के बीच किसी बात को लेकर विवाद था। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच रंजिश बढ़ गई। सरकारी वकील कुलदीप सिंह के मुताबिक, इसी रंजिश के चलते विपुल उर्फ खूनी अपने साथियों के साथ अशोक कुमार के घर पहुंचा था।
विपुल उर्फ खूनी और राहुल उर्फ घोसी भभीसा गांव के रहने वाले थे। वहीं रामवीर वीरघेड़ा, राजीव बड़ौत और हरेंद्र कंजाहेड़ी गांव के रहने वाले हैं। हमलावरों के निशाने पर अशोक कुमार थे, लेकिन बदमाशों को देखकर वह कमरे में छिप गए और पवन की हत्या कर दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने कुल 9 गवाह पेश किए।
पवन के भाई और भाभी की गवाही रही अहम
कुलदीप सिंह ने बताया कि पवन के भाई अशोक कुमार और उनकी पत्नी सोनबीरी की गवाही अहम रही। दोनों ने कोर्ट में घटना से जुड़े साक्ष्य भी पेश किए। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल से कारतूस के खोखे, खून लगी मिट्टी और अन्य सामान बरामद किया था। इन्हें भी कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया गया।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक, आरोपी राहुल उर्फ घोसी के पास से हत्या में इस्तेमाल 315 बोर का तमंचा और कारतूस बरामद हुए थे। उसे आर्म्स एक्ट के मामले में भी दोषी ठहराया गया।
पवन खेती-किसानी करते थे। मृतक के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा आदित्य BSF में है, जबकि छोटा बेटा आशू खेती करता है। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
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