अरावली को छूना मना! सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा जू सफारी प्रोजेक्ट पर लगाई रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हरियाणा सरकार द्वारा अरावली क्षेत्र में प्रस्तावित जू सफारी प्रोजेक्ट को अनुमति देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि अरावली पर्वतमाला को किसी भी हाल में नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की खंडपीठ ने कहा कि जू सफारी प्रोजेक्ट की सुनवाई तब ही होगी जब अरावली रेंज की सीमा और परिभाषा विशेषज्ञों द्वारा स्पष्ट कर दी जाएगी।
अरावली क्षेत्र में कोई छेड़छाड़ नहीं
हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में क्षेत्रफल को 10,000 एकड़ से घटाकर 3,300 एकड़ किया गया है और इसे केंद्रीय सशक्त समिति को प्रस्तुत करना चाहते हैं। खंडपीठ ने कहा कि वे विशेषज्ञ नहीं हैं और अरावली की परिभाषा विशेषज्ञ तय करेंगे। जब तक यह परिभाषा अंतिम नहीं होती, किसी को अरावली क्षेत्र में कोई गतिविधि करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अरावली केवल हरियाणा या राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई राज्यों में फैली एक महत्वपूर्ण पर्वतमाला है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही जू सफारी प्रोजेक्ट पर कोई फैसला लिया जाएगा।
पर्यावरण के लिए खतरा
इस प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अक्तूबर 2025 में रोक लगा दी थी। जू सफारी को गुड़गांव और नूह जिलों में 10,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाना था। इसमें बड़े बिल्लियों के क्षेत्र, पक्षियों, सरीसृपों और तितलियों के संरक्षण के लिए विशेष जोन बनाए जाने थे।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पांच सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों और पर्यावरण संगठन पीपल फॉर अरावलीज़ की याचिका पर सुनवाई हो रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पहले से क्षतिग्रस्त अरावली क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा है। न्यायालय ने पहले ही निर्णय लिया था कि अरावली हिल्स और रेंज की नई परिभाषा के अनुसार किसी भी तरह की खनन या विकास गतिविधि की अनुमति विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों और मंत्रालय की सिफारिशें
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और वन मंत्रालय की समिति की सिफारिशें भी मान ली हैं। इसके अनुसार, अरावली हिल वह स्थल होगा जिसकी ऊंचाई स्थानीय स्तर से 100 मीटर या अधिक होगी, जबकि अरावली रेंज दो या दो से अधिक ऐसे हिल्स का संग्रह होगी, जो कम से कम 500 मीटर की दूरी पर स्थित हों।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.