मणिपुर के कुकी-जो कैंप में 159 की जगह मिला एक कैडर, सभी 14 कैंपों का होगा ऑडिट

HIGHLIGHTS
- मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने शुक्रवार को सिनाई कैंप में अभियान चलाया था।
- कैंप में 17 ऐसे लोग मिले, जो समझौते के तहत पंजीकृत कैडर के रूप में पहचाने नहीं गए।
- गिरफ्तार किए गए सभी 17 लोगों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू होने के करीब साढ़े तीन साल बाद सुरक्षा बलों ने कुकी-जो उग्रवादियों के लिए निर्धारित एक कैंप पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। कांगपोकपी जिले के सिनाई कैंप में 159 पंजीकृत उग्रवादियों के रहने की उम्मीद थी, लेकिन वहां केवल एक कैडर मिला। इस खुलासे के बाद सुरक्षा बलों ने राज्य के सभी 14 निर्धारित कैंपों का ऑडिट करने का फैसला लिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के साथ संघर्ष विराम समझौते की अवधि समाप्त हो चुकी है और इसके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सिनाई कैंप में छापेमारी के दौरान क्या मिला?
मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को सिनाई कैंप में अभियान चलाया और शनिवार को इस पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कैंप में 159 पंजीकृत कैडरों के रहने की निर्धारित संख्या के मुकाबले केवल एक कैडर मौजूद मिला।
इसके अलावा, वहां 17 ऐसे लोग भी मिले, जिनकी पहचान समझौते के तहत पंजीकृत कैडरों के रूप में नहीं हुई। पुलिस ने सभी 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। मामले में कैंप के अधिकारियों की भूमिका, पहचान छिपाकर रहने, बिना अनुमति हथियार रखने और समझौते के नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है।
कैंप से कितने हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए?
सुरक्षा बलों ने सिनाई कैंप से 24 आग्नेयास्त्र, 38 मैगजीन, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक, वायरलेस संचार उपकरण और लड़ाई में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान जब्त किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, कैंप में मौजूद नहीं मिले कैडरों को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। कुछ के घर जाने, जबकि कुछ के दूसरे स्थानों पर होने की बात कही गई है। सुरक्षा बल इन दावों की जांच कर रहे हैं।
राज्य में पहली बार किसी निर्धारित कुकी-जो उग्रवादी कैंप को सीधे अपने नियंत्रण में लेने की यह कार्रवाई सामान्य जांच से अलग है। अब सभी 14 कैंपों का ऑडिट कर यह पता लगाया जाएगा कि सिनाई में मिली गड़बड़ी केवल इसी कैंप तक सीमित है या दूसरे कैंपों में भी समझौते के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
क्या संघर्ष विराम समझौता खत्म होने से उग्रवादी कैंप छोड़ सकते हैं?
कुकी-जो उग्रवादी संगठनों और केंद्र सरकार के बीच संघर्ष विराम समझौता 4 सितंबर को समाप्त हो गया था, लेकिन इसका नवीनीकरण नहीं हुआ है। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की थी।
हालांकि, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समझौता औपचारिक रूप से रद्द नहीं हुआ है। ऐसे में उग्रवादियों को निर्धारित कैंपों में रहना होगा और उनके हथियार भी तय सुरक्षा व्यवस्था के तहत वहीं रखे जाने चाहिए।
समझौते को आगे बढ़ाना है या नहीं, इसका फैसला केंद्र सरकार को करना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य हिंसा रोकना और बातचीत के माध्यम से राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था।
समझौते के नियम क्या हैं और इसे लेकर विवाद क्यों बढ़ा?
केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जो उग्रवादी संगठनों ने अगस्त 2008 में औपचारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी शुरुआत 2005 में भारतीय सेना और कुकी उग्रवादी समूहों के बीच आपसी अभियान रोकने की सहमति से हुई थी।
इस समझौते में कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट के अंतर्गत आने वाले संगठन शामिल हैं। समझौते के नियमों के अनुसार, कैडरों को हिंसा से दूर रहना, निर्धारित कैंपों में रहना और हथियारों को तय सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखना होता है।
फरवरी 2024 में मणिपुर विधानसभा ने समझौते को रद्द करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। नगा संगठनों ने भी इसे समाप्त करने की मांग की है। आरोप लगते रहे हैं कि समझौते में शामिल कुछ उग्रवादी समूहों ने नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले किए हैं।
नॉन्गशुम में हत्याओं के बाद सुरक्षा अभियान क्यों तेज हुआ?
सिनाई कैंप पर कार्रवाई 19 अक्टूबर को नॉन्गशुम के पास तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के बाद तेज किए गए सुरक्षा अभियानों के दौरान हुई। इस मामले में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से दो ने कथित तौर पर हमले में शामिल होने की बात स्वीकार की है।
मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच शुरू हुए संघर्ष में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। मणिपुर के गृह मंत्री ने कहा है कि सुरक्षा अभियान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा। कुकी, मैतेई और नगा समूहों से जुड़े कैंपों की भी जांच की जाएगी।
अब सभी 14 कैंपों के ऑडिट से यह पता चलेगा कि संघर्ष विराम व्यवस्था का किस हद तक पालन किया जा रहा है और इस समझौते का भविष्य क्या होगा।
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