अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर क्या हो रहा है? ओवैसी ने केंद्र से मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- ओवैसी ने सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई।
- उन्होंने भारतीय जवानों और स्थानीय नागरिकों को रोके जाने की खबरों पर सवाल उठाए।
- AIMIM प्रमुख ने कहा कि पहले उठाए गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों और भारतीय जवानों व स्थानीय नागरिकों को रोके जाने की खबरों पर सरकार देश को पूरी जानकारी नहीं दे रही है।
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से सवाल किया कि अरुणाचल प्रदेश में आखिर क्या हो रहा है और अब तक इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने सीमा की स्थिति पर संसद में चर्चा कराने और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
आईटीबीपी के डीजी की जानकारी पर उठाए सवाल
ओवैसी ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की ओर से अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ लगातार टकराव की बात सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जब सीमा पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो सरकार को देश के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि वह पहले भी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।
चीनी सैनिक कहां घुसे, सरकार से मांगा जवाब
AIMIM प्रमुख ने केंद्र सरकार से उन क्षेत्रों के नाम बताने की मांग की है, जहां चीनी सैनिकों के घुसने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारतीय गश्ती दलों और स्थानीय नागरिकों को इन इलाकों में जाने से रोका गया है और क्या चीनी सैनिक वहां से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
ओवैसी यह भी जानना चाहते हैं कि ऐसी स्थिति कब से बनी हुई है और चीन के साथ बातचीत के दौरान भारत सरकार ने इस मुद्दे को किस तरह उठाया है।
पीएम मोदी के पुराने बयान का भी किया जिक्र
ओवैसी ने जून 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चीन से जुड़े सीमा विवाद पर दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि उस समय दिए गए बयानों और बाद में सामने आई घटनाओं के बीच क्या संबंध है।
उनके मुताबिक, सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
इस विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने भी भारत-चीन सीमा की स्थिति पर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विस्तृत जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सीमा पर तनाव उस समय बढ़ सकता है, जब चीनी सैनिक तय गश्त के तरीकों से अलग गतिविधियां करते हैं। ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए दोनों देश राजनयिक और सैन्य स्तर पर स्थापित तंत्रों का इस्तेमाल करते हैं।
LAC पर बातचीत जारी, शांति बनाए रखने पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने कुछ क्षेत्रों में LAC को लेकर अपनी समझ बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करने पर भी सहमति जताई है।
मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है।
संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
ओवैसी ने सीमा की स्थिति और चीन के प्रति भारत की नीति पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में सरकार को खुलकर जवाब देना चाहिए।
उनका कहना है कि सीमा पर वास्तविक स्थिति के बारे में देश को भरोसे में लेना जरूरी है। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आगे क्या जानकारी दी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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