ड्रग तस्करी की कमाई से संपत्तियां खरीदने का आरोप, बनीत सिंह तलवार गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- ईडी ने बनीत सिंह तलवार को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
- तीस हजारी कोर्ट ने आरोपी को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजा है।
- मामले की जांच एनआईए की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुख्यालय ने शुक्रवार को बनीत सिंह तलवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले में की गई है। इस मामले में नशीले पदार्थों को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क के भीतर छिपाकर रखा गया था। इसके अलावा, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में भी नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे। तीस हजारी कोर्ट में पीएमएलए मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश ने आरोपी बनीत सिंह तलवार को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़े हैं मामले के तार
ईडी ने यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य लोगों के खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी के संबंध में यूएपीए, 1967, एनडीपीएस एक्ट, 1985 और आईपीसी, 1860 की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।
इससे पहले एनआईए इस मामले में छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी थी। इनमें कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
नशे की कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद की फंडिंग में
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड वांछित आरोपी 'वितेश कोसर' उर्फ 'राजू दुबई' बताया गया है। इसमें पाकिस्तानी आईएसआई एजेंट और अफगान नागरिक भी शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से अर्जित 76 करोड़ रुपये की रकम हवाला के माध्यम से अफगानिस्तान भेजी गई। आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय मदद देने के लिए किया गया।
ऐसे रची गई साजिश
ईडी की अब तक की वित्तीय जांच में पता चला है कि प्रतिबंधित सामानों की तस्करी, ड्रग्स की बिक्री से मिली रकम को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजने और अन्य सामानों के माध्यम से कुल 89 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित रकम जुटाई गई। इस तरह की रकम की कुल मात्रा का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
बनीत सिंह तलवार, हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। जांच के अनुसार, हरप्रीत सिंह तलवार ने सिंडिकेट के मास्टरमाइंड 'राजू दुबई' के साथ मिलकर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी में सहायता की थी। एनआईए के मामले में हरप्रीत सिंह तलवार की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत सिंह तलवार उन व्यावसायिक इकाइयों का प्रबंधन और संचालन करता रहा, जो हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थीं।
बनीत सिंह तलवार ने 'मैजेंट इंडिया' नाम की कंपनी को 55 लाख रुपये से अधिक की रकम दी थी। यह कंपनी हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थी। वित्तीय विश्लेषण में कई बार राउंड-ट्रिपिंग यानी रकम को अलग-अलग माध्यमों से घुमाकर वापस लाने की प्रक्रिया सामने आई।
जांच के मुताबिक, हरप्रीत सिंह तलवार ने अपराध से अर्जित रकम को विभिन्न व्यावसायिक इकाइयों में लगाया। इसके बाद कई स्तरों पर हुए लेन-देन के जरिए यह रकम वापस बनीत सिंह तलवार तक पहुंची। इन लेन-देन में अलग-अलग कंपनियों के बीच एक जैसी और मिलती-जुलती प्रविष्टियां पाई गईं, जो धन के सुनियोजित प्रवाह की ओर संकेत करती हैं।
ईडी के अनुसार, बनीत सिंह ने बेनामी इकाइयों के नाम पर वाहन खरीदने के लिए नकद जमा का इस्तेमाल किया था। इन वाहनों को एजेंसी पहले ही जब्त कर चुकी है। इसके अलावा, बनीत सिंह तलवार ने हरप्रीत सिंह तलवार से प्राप्त रकम का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में भी किया। बताया गया है कि इन संपत्तियों का लाभ अब भी हरप्रीत सिंह तलवार और उनका परिवार उठा रहा है।
ईडी ने कहा कि यह गिरफ्तारी ड्रग तस्करी के रैकेट को तोड़ने और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग तथा हवाला लेन-देन के नेटवर्क के खिलाफ सरकार की सामूहिक रणनीति का हिस्सा है। एजेंसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की आर्थिक व्यवस्था की अखंडता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
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