माघ मेले में विवाद के बीच शंकराचार्य ने की डिप्टी सीएम केशव की सराहना

संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच जारी विवाद अब भी थमता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह टिप्पणी इस ओर संकेत करती है कि प्रशासनिक स्तर पर कहीं न कहीं चूक हुई है। उन्होंने इसे एक समझदारी भरा और सच्चाई को स्वीकार करने वाला बयान बताया।
शंकराचार्य ने कहा कि यदि ऐसे विचार नेतृत्व में होते तो प्रदेश को भी लाभ होता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विवाद की शुरुआत प्रशासन की ओर से हुई थी, लेकिन अब तक कोई भी अधिकारी उनसे बात करने नहीं पहुंचा है।
वसंत पंचमी पर नहीं किया स्नान
माघ मेले के चौथे स्नान पर्व वसंत पंचमी पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम में स्नान नहीं किया। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन वह शिविर से स्नान के लिए निकले थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें गंगा में प्रवेश से रोक दिया था। उनका कहना है कि जब तक उन्हें ससम्मान स्नान नहीं कराया जाता और भविष्य के लिए स्पष्ट व्यवस्था की घोषणा नहीं होती, तब तक उनकी स्थिति वही बनी रहेगी।
पुरी शंकराचार्य के निर्णय पर क्या बोले
पुरी के शंकराचार्य द्वारा बिना पालकी के स्नान करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह उनकी निजी इच्छा है। शंकराचार्य पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जा सकता कि वे किस तरह से जाएं या लौटें।
स्वास्थ्य को लेकर भी दिया बयान
उन्होंने बताया कि ठंडी पूरब की हवा में देर तक बैठने से उन्हें थकान महसूस हुई थी, लेकिन अब वे ठीक हैं। एहतियात के तौर पर उन्होंने खुद को ढक कर रखा।
गोप्रतिष्ठा यात्रा स्थगित
भीड़ अधिक होने के कारण वसंत पंचमी के दिन गोप्रतिष्ठा यात्रा नहीं निकाली गई। शंकराचार्य ने कहा कि यह यात्रा अगले दिन से फिर नियमित रूप से जारी रहेगी।
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