सोनिया गांधी का BJP पर हमला, बोलीं- 12 साल में लोकतंत्र और संस्थाओं को पहुंचा भारी नुकसान

HIGHLIGHTS
- उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी संस्थाओं को दोबारा मजबूत करने में समय लगेगा।
- आपातकाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को निलंबित किया गया था।
- उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी ने मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला लिया था और बाद में आपातकाल की ज्यादतियों पर खेद जताया था।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बीते 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आपातकाल के दौर को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि उस समय लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदियां लगाई गई थीं, लेकिन ये कदम संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उठाए गए थे।
अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल खत्म होने के बाद ही उन्हें उस समय की वास्तविक परिस्थितियों और उनकी गंभीरता का पता चला था। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगी थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) के अधिकार को भी निलंबित कर दिया गया था।
मोदी सरकार और भाजपा पर लगाया लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप
सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की बुनियाद, लोकतंत्र और संस्थाओं को भारी क्षति पहुंची है। उनके मुताबिक, अब लोगों को भी इस नुकसान का एहसास होने लगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के मतदाता लोकतांत्रिक व्यवस्था को दोबारा मजबूत बनाने और बेहतर शासन की वापसी का समर्थन करेंगे।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी संस्थाओं और व्यवस्थाओं को फिर से पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को गंभीर प्रयास करने होंगे। सोनिया गांधी ने कहा कि लोगों में बेचैनी बढ़ रही है और वे मौजूदा हालात से होने वाले नुकसान को महसूस कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारत के लोग बेहतर शासन व्यवस्था की वापसी का स्वागत करेंगे।
आपातकाल को लेकर सोनिया गांधी ने क्या कहा?
वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि उस दौरान 21 महीने तक लोकतांत्रिक अधिकार सीमित रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बाद में परिस्थितियों को समझते हुए मार्च 1977 में लोकसभा चुनाव कराने का निर्णय लिया था।
सोनिया गांधी के अनुसार, आपातकाल समाप्त होने के बाद ही उन्हें पता चला कि उस दौरान देश में क्या कुछ हुआ था और स्थिति कितनी गंभीर थी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदी और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार का निलंबन हुआ था, लेकिन ये सभी कदम संवैधानिक तरीके से उठाए गए थे।
सशस्त्र बलों से सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की अपील का किया जिक्र
आपातकाल के समय की परिस्थितियों पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ते हालात को संभालने की कोशिश कर रही थीं। उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन के साधनों में आगजनी की घटनाएं हो रही थीं और बड़े स्तर पर संगठित अशांति फैली हुई थी।
उन्होंने दावा किया कि उस दौर में नौकरशाही और सशस्त्र बलों से भी सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने की अपील की गई थी।
सोनिया गांधी ने कहा कि आपातकाल लगाने के फैसले से पैदा हुई स्थिति का समाधान अंततः लोकतांत्रिक तरीके से ही निकाला गया। उन्होंने कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन घटनाओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। इंदिरा गांधी ने हालात का आकलन करने के बाद मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला लिया था। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने बाद में सार्वजनिक रूप से आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर अफसोस जताया था और इसके लिए माफी भी मांगी थी।
किताब में राजीव गांधी और उनके परिवार से जुड़ने की कहानी
सोनिया गांधी इन दिनों अपनी संस्मरण पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के लॉन्च को लेकर भी चर्चा में हैं। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इस किताब में उनके जीवन में प्रेम और अपनापन विकसित होने की कहानी है। इसमें बताया गया है कि किस तरह वह पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पति राजीव गांधी के परिवार के करीब आईं और उनके देश से जुड़ाव महसूस करने लगीं। इसी रिश्ते ने आगे चलकर उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया।
सोनिया गांधी ने कहा कि वह लंबे समय तक इस विषय पर बात नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किताब केवल उनके और राजीव गांधी की प्रेम कहानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके परिवार और उस देश से जुड़ने का सफर भी शामिल है, जिससे राजीव गांधी का संबंध था। उन्होंने बताया कि किस तरह वह धीरे-धीरे उस परिवार और देश का हिस्सा बन गईं।
उन्होंने आगे कहा कि इसी जुड़ाव और प्रेम ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने की प्रेरणा दी। जब उन्हें लगा कि राजीव गांधी के परिवार ने जिन उद्देश्यों के लिए अपने जीवन में बलिदान दिए थे, वे खतरे में हैं और कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, तब उन्हें लगा कि उन्हें भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
इटली में बचपन से भारत आने तक का सफर भी किताब में शामिल
सोनिया गांधी की संस्मरण पुस्तक 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' में उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। किताब में युद्ध के बाद के इटली में बीते उनके बचपन से लेकर उस प्रेम कहानी तक का जिक्र है, जिसके चलते वह भारत आईं।
इसके अलावा इसमें उनके जीवन के व्यक्तिगत दुखों, भारत के साथ विकसित हुए उनके रिश्ते और इस देश को अपना बनाने के सफर का भी वर्णन किया गया है।
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