मेरठ सेंट्रल मार्केट में धरना 11वें दिन भी जारी, महिलाओं का विरोध तेज

HIGHLIGHTS
- शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सेटबैक और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का धरना रविवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा।
- धरने पर बैठी महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय वोट मांगने के लिए हाथ जोड़कर और पैर छूने आने वाले सांसद, विधायक और महापौर अब पूरी तरह गायब हैं।
- महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों में जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान नहीं करते, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
- सीलिंग और सेटबैक को…
मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सेटबैक और सीलिंग कार्रवाई के विरोध में महिलाओं का धरना रविवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठी महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय वोट मांगने के लिए हाथ जोड़कर और पैर छूने आने वाले सांसद, विधायक और महापौर अब पूरी तरह गायब हैं।
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों में जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान नहीं करते, तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगी।
सीलिंग और सेटबैक को लेकर बढ़ा विरोध
सेंट्रल मार्केट में चल रही सीलिंग कार्रवाई के बाद से व्यापारी और स्थानीय लोग लगातार विरोध जता रहे हैं। सेक्टर-2 में महिलाएं सेटबैक छोड़ने की अनिवार्यता के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। रविवार को धरना स्थल पर आयोजित प्रेस वार्ता में महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें धरना समाप्त करने के लिए मुकदमे दर्ज करने की धमकी दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को 661/6 सहित सभी अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए थे। कार्रवाई में देरी को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा अवमानना याचिका भी दायर की गई थी।
इसके बाद 27 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। सेंट्रल मार्केट में कुल 860 आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलने की बात सामने आई थी, जिनमें से 144 को बंद कराया जा चुका है।
661/6 भवन को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 44 भवनों को 8 अप्रैल को सील किया गया था। अब 815 भवनों को लेकर आवास विकास परिषद द्वारा दो सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किए जाने की तैयारी है।
सेटबैक को लेकर मकान गिरने का खतरा जताया
धरने पर बैठीं महिलाओं का कहना है कि सेक्टर-2 में अधिकतर मकान आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हैं, जहां लोग पिछले 35–40 वर्षों से रह रहे हैं। इन छोटे और पतली दीवारों वाले मकानों में सेटबैक छोड़े जाने की स्थिति में भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा और आसपास के घर भी प्रभावित हो सकते हैं।
पुलिस पर दबाव और धमकी के आरोप
महिलाओं ने पुलिस पर धरना खत्म कराने के लिए दबाव बनाने और मुकदमे दर्ज करने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
वहीं तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज गर्ग ने भी पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि व्यापारी किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
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