बंगाल में SIR को लेकर टीएमसी सांसदों ने ईसी से की मुलाकात, उठाए संवेदनशील सवाल

कोलकाता। मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से मुलाकात की और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
टीएमसी सांसदों का कहना था कि यदि एसआईआर का उद्देश्य नकली वोटरों और घुसपैठियों की पहचान करना है, तो फिर सिर्फ बंगाल क्यों? मेघालय और त्रिपुरा जैसी सीमावर्ती राज्य क्यों इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर का लक्ष्य सभी राज्यों में समान रूप से लागू किया जाना है और बाकी राज्यों में भी इसे जल्द ही लागू किया जाएगा। आयोग से मिलने आए टीएमसी के दस सांसदों में से डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी राय और महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के सामने अपनी बात रखी।
देरी और संवेदनशीलता पर उठाए सवाल
राज्यसभा में टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर सवाल नहीं है, लेकिन इसे जल्दबाजी में लागू करने के तरीके पर आपत्ति है। उन्होंने आयोग से इस प्रक्रिया के लिए अधिक समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पांच बिंदुओं का ज्ञापन सौंपा गया और 40 मिनट तक अपनी बात रखी, जबकि आयोग की ओर से एक घंटे तक जवाब दिया गया, लेकिन उनके सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
बीएलओ और आम लोगों की मौतों का मुद्दा उठाया
टीएमसी सांसदों ने बीएलओ और आम लोगों की हुई मौतों का भी मुद्दा उठाया। आयोग ने आश्वासन दिया कि इन घटनाओं की जांच कराई जाएगी। सांसदों का कहना था कि यह घटनाएं तब सामने आ रही हैं जब एसआईआर का काम लगभग पूरा हो चुका है।
टीएमसी का दावा है कि अब तक 74 प्रतिशत गणना फार्म भरे और जमा किए जा चुके हैं। सांसदों के साथ पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी का पत्र भी था, जो उन्हें आयोग से चर्चा के लिए अधिकृत कर रहा था।
TMC की ओर से पूछे गए सवाल
-
एसआईआर के दौरान हुए दबाव और घबराहट में हुई मौतों की जिम्मेदारी आयोग कब लेगा?
-
क्या आयोग मानता है कि बीजेपी अब बंगाल में अपनी सरकार चला रही है और इसका असर मतदाता सूची पर पड़ेगा?
-
बांग्ला सहायता केंद्र के स्टाफ को डेटा एंट्री में मदद की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही?
-
बीजेपी के दावे कि बंगाल में एक करोड़ नाम हटाए जाएंगे, का मतलब क्या है कि अब चुनाव आयोग पर भाजपा का नियंत्रण है?
TMC सांसदों की यह मुलाकात 28 नवंबर के समय पर हुई थी और पार्टी ने इसे संवेदनशील मुद्दों को उठाने के लिए अधिकृत किया था।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.