नगालैंड CM नेफ्यू रियो ने अमित शाह से FCRA संशोधनों पर पुनर्विचार की अपील की

HIGHLIGHTS
- रियो ने प्रस्तावित बदलावों की व्यापक जांच की मांग की।
- संबंधित हितधारकों को अपनी राय रखने का अवसर देने का सुझाव दिया।
- ईसाई समुदाय की ओर से संशोधनों पर चिंता जताए जाने की बात कही।
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संगठनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इससे राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका है।
रियो ने सुझाव दिया कि एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों को विस्तृत जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाए। साथ ही संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों को समिति के सामने अपने विचार रखने का अवसर दिया जाए।
पत्र में नगालैंड सीएम ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे उठ रही चिंताओं को दूर करने और आशंकाओं का समाधान करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा और जनता का भरोसा बढ़ाया जा सकेगा।
सोमवार को अमित शाह को भेजे पत्र में रियो ने कहा कि ऐसा कदम एनडीए सरकार के समावेशी और सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाएगा। साथ ही इससे संवैधानिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्ष भावना और सभी समुदायों के अधिकारों व योगदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई जाएगी।
इस साल जून में सरकार ने अधिसूचित किए थे FCRA नियम
इस साल जून में केंद्र सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने से संबंधित संशोधित एफसीआरए नियम अधिसूचित किए थे। इनके तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को पहले से तय उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों की सूची में से चयन करना होगा।
हालांकि संशोधित नियमों में विभिन्न धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई है, लेकिन एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र कई श्रेणियों में धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाली गतिविधियों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में इस पर चर्चा होने की संभावना है।
रियो ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, खासतौर पर ईसाई समुदाय की ओर से प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई गई है। उन्होंने बताया कि नगालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल और कोहिमा के बिशप ने भी केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन देकर चर्चों और उनसे जुड़े धर्मार्थ संगठनों के सामने आ रही परेशानियों को सामने रखा है।
नगालैंड के विकास में चर्चों की महत्वपूर्ण भूमिका
रियो ने आग्रह किया कि नगालैंड की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक और विकास से जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन ज्ञापनों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए।
नगालैंड की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी ईसाई है। इसका उल्लेख करते हुए रियो ने कहा कि चर्चों ने राज्य के आध्यात्मिक और सामुदायिक जीवन के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक कल्याण, आजीविका सहायता तथा वंचित और कमजोर वर्गों की मदद में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि खासतौर पर दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मानवीय सहायता और सामाजिक सेवा से जुड़ी कई गतिविधियों को वैध विदेशी अंशदान, साझेदारी और सहायता के माध्यम से समर्थन मिला है।
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