बिझौली गांव में बंदरों से राहत के लिए दो युवकों ने अपनाया तेंदुए का ड्रेसिंग तरीका

लखीमपुर खीरी। बिझौली गांव के ग्रामीण पिछले दस वर्षों से बंदरों के हमलों से परेशान थे। घरों में घुसकर राशन उठाना, बिजली के खंभों की लाइट तोड़ना और कभी-कभी लोगों पर झपटना-इन कारणों से गांव में डर का माहौल बन गया था। अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई स्थायी उपाय नहीं किया गया।
तंग आकर दो युवकों, गोविंद और रूपराम ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने बाघ की वेशभूषा पहनकर गांव की गलियों और खुले मैदानों में गश्त शुरू कर दी। ग्रामीणों के अनुसार, बंदरों का झुंड उनके डरावने अंदाज को देखकर गांव की सीमा पार भाग गया और लगभग एक सप्ताह तक कोई गतिविधि नहीं दिखाई दी।
गोविंद सिंह ने बताया, “बंदर अब भी कभी-कभार लौट आते हैं, लेकिन उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। बाघ की ड्रेस ने अस्थायी तौर पर हमारे लिए राहत दी है।”
ग्रामीणों का कहना है कि यह तरीका केवल अस्थायी समाधान है। स्थायी राहत के लिए वन विभाग और प्रशासन को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि बिझौली गांव को वर्षों से परेशान करने वाली बंदर समस्या का स्थायी समाधान मिल सके।
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