अमेरिकी टैरिफ की चोट: मुरादाबाद में डेढ़ लाख कामगार बेरोजगार, निर्यात बुरी तरह प्रभावित

अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ का सीधा असर अब हस्तशिल्प उद्योग की जड़ों तक पहुंचने लगा है। निर्यात ऑर्डर घटने से कई फैक्टरियों ने उत्पादन सीमित कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अनेक यूनिट्स हफ्ते में दो दिन ताले डालने को मजबूर हैं, जबकि बड़ी संख्या में कामगारों को काम से हटाया जा रहा है।
इस संकट का सबसे गहरा प्रभाव उन कारीगरों पर पड़ा है, जो ठेके या दैनिक मजदूरी पर फैक्टरियों में काम करते थे। उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, बीते छह महीनों से निर्यात में लगातार गिरावट के चलते करीब डेढ़ लाख कामगार रोजगार गंवा चुके हैं। पिछले वर्ष हस्तशिल्प कारोबार से लगभग साढ़े पांच लाख लोग जुड़े हुए थे, लेकिन अब इनमें से केवल करीब 3.85 लाख लोगों के पास ही काम बचा है।
निर्यातक अजय गुप्ता के मुताबिक जिले में छह हजार से अधिक फैक्टरियों में हस्तशिल्प उत्पाद तैयार होते हैं। बीते छह महीनों में निर्यात 25 से 30 प्रतिशत तक घट गया है। पीतलनगरी में कार्यरत कारीगरों में से लगभग 30 प्रतिशत को काम से हटाया जा चुका है। यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल का कहना है कि अमेरिका से मिलने वाले ऑर्डर कम होने के कारण कई फैक्टरियों में काम के घंटे घटा दिए गए हैं। जिले में करीब 100 फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां सप्ताह में दो दिन उत्पादन पूरी तरह बंद रखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी टैरिफ की 50 प्रतिशत दर बनी रही तो एक साल के भीतर हस्तशिल्प निर्यात ठप होने की कगार पर पहुंच सकता है। धातुओं की लगातार बढ़ती कीमतें भी संकट को और गहरा कर रही हैं।
जिला उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पीतलनगरी से हर साल औसतन 10,437 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात होता था, लेकिन बीते वर्ष यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत गिरकर लगभग सात हजार करोड़ रुपये पर सिमट गया। एमएचईए के अध्यक्ष नावेद उर रहमान ने बताया कि कुल निर्यात ऑर्डर का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका से आता है।
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिकी खरीदारों ने पिछले तीन महीनों से नए ऑर्डर रोक रखे हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते सरकारी सब्सिडी योजनाओं का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। फैक्टरियों को चलाने के लिए बड़े ऑर्डर जरूरी हैं, जबकि छोटे ऑर्डर से लागत भी नहीं निकल पा रही।
फैक्टरियों में ठेके पर काम करने वाले कारीगर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ऑर्डर की कमी के कारण कई ठेकेदार महीनों से खाली बैठे हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात नहीं सुधरे और महंगाई यूं ही बढ़ती रही, तो आने वाले समय में हजारों और परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
निर्यातक विभोर गुप्ता का कहना है कि अमेरिका समेत अन्य देशों के खरीदारों से बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकल रहा। वहीं, उद्योग से जुड़े मोहम्मद अख्तर शम्सी के अनुसार अमेरिकी बाजार में पुराने स्टॉक की बिक्री न होने के कारण नए ऑर्डर मिलने में मुश्किलें आ रही हैं। स्थिति सुधरने में अभी वक्त लग सकता है।
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