पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा ने जारी की तीसरी सूची, 19 नए उम्मीदवारों के नाम घोषित

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार शाम को तीसरी उम्मीदवार सूची जारी की। इस सूची में पार्टी ने कुल 19 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया है। इसमें पूर्व एनएसजी कमांडो और आरजी कर रेप पीड़िता की मां को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है।
पहली सूची में भाजपा ने 144 और दूसरी सूची में 111 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। इससे पहले की सूची में निसिथ प्रमाणिक, प्रियंका टिबरेवाल और रूपा गांगुली जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। अब तक भाजपा ने कुल 274 उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है।


भाजपा ने किस-किस सीट से उम्मीदवार उतारे
भाजपा ने तीसरी सूची में निम्नलिखित सीटों से उम्मीदवार घोषित किए हैं:
- कूचबिहार दक्षिण (सीट 4): रथींद्र नाथ बोस
- राजगंज (सीट 18): दिनेश सरकार (हराधन सरकार)
- इस्लामपुर (सीट 29): चित्रजीत रॉय
- हेमताबाद (सीट 33): हरिपदा बर्मन
- इंग्लिश बाजार (सीट 51): अमलन भादुड़ी
- शांतिपुर (सीट 86): स्वपन दास
- पानीहाटी (सीट 111): रत्ना देबनाथ (आरजी कर रेप पीड़िता की मां)
- हावड़ा मध्य (सीट 171): बिप्लब मंडल
- उत्तरपाड़ा (सीट 185): दीपांजन चक्रवर्ती
- सिंगुर (सीट 188): डॉ. अरूप कुमार दास
- चंदननगर (सीट 189): दीपांजन कुमार गुहा
इसके अलावा सूची में शामिल हैं:
- चूंचुड़ा (सीट 190): सुबीर नाग
- हरिपाल (सीट 196): मधुमिता घोष
- तामलुक (सीट 203): डॉ. हरे कृष्णा बेरा
- मेदिनीपुर (सीट 236): डॉ. शंकर गुच्छैत
- पूर्वस्थली दक्षिण (सीट 268): प्राणकृष्ण तपदार
- कटवा (सीट 270): कृष्णा घोष
- सैंथिया (सीट 289): कृष्णा कांत साहा
- नलहाटी (सीट 293): अनिल सिंह
पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
समिक भट्टाचार्य का दावा: बंगाल से टीएमसी का विसर्जन
पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी पूरी तरह टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "भाजपा 365 दिन काम करने वाली पार्टी है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और बूथ अध्यक्ष दोनों सक्रिय हैं। पार्टी किसी भी तरह से तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।"
भट्टाचार्य ने टीएमसी और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बीच गठजोड़ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि "टीएमसी की यह असली सियासत है। विभाजनकारी राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल आने के बाद ओवैसी बाबरी मस्जिद का नाम लेने की हिम्मत कर रहे हैं। अगर लोग चुप रहते हैं, तो भविष्य में कालीघाट के सामने विवाद खड़ा हो सकता है।"
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