सबरीमाला केस में तंत्री का दावा: महिला प्रवेश विवाद ने मेरी छवि बिगाड़ी

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़ी कथित सोने की गबन मामलों में गिरफ्तार तंत्री कंदरारु राजीवारु ने अपनी गिरफ्तारी को 2018 में हुए महिला प्रवेश विवाद से जोड़कर देखा है। उनका दावा है कि उस समय मंदिर की परंपराओं की रक्षा के लिए उनका सख्त रुख रखने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हाल ही में कोल्लम विजिलेंस कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आया है।
राजीवारु पर दो अलग-अलग मामलों में आरोप हैं। एक मामले में वह मंदिर के द्वारपालक देवता के स्वर्ण आभूषणों के कथित नुकसान में 16वें आरोपी हैं, जबकि दूसरे मामले में श्रीकोविल के दरवाजों से सोने के गायब होने के 13वें आरोपी हैं। जमानत सुनवाई के दौरान उनके वकील ने तर्क दिया कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब महिलाओं के प्रवेश का विवाद उभरा, तब तंत्री ने परंपराओं की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया और कहा कि यदि स्थापित रीति-रिवाजों का उल्लंघन हुआ तो वह पूजा नहीं करेंगे।
तंत्री ने अदालत में कहा कि कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सत्तारूढ़ दल के दबाव में मंदिर के प्रवेश नियमों में ढील देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने भगवान के ‘नित्य ब्रह्मचारी’ स्वरूप का हवाला देते हुए आपत्ति जताई और दावा किया कि इसी कारण उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए उन्हें इन मामलों में फंसाया गया।
राजीवारु ने एसआईटी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड पर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि मंदिर का प्रशासन बोर्ड के जिम्मे है और उनका काम केवल शास्त्रों के अनुसार पूजा संपन्न कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वर्ण आभूषणों के कथित गबन में बोर्ड के कुछ अधिकारी और बाहरी लोग शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष जांच दल ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के साथ उनके संबंध को मुद्दा बनाकर मामले को भटकाने की कोशिश की, जबकि पोट्टी की नियुक्ति उनका नहीं किया गया था।
कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि तंत्री के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं। अदालत ने यह भी माना कि एसआईटी आपराधिक साजिश साबित करने में असफल रही है और जरूरी दस्तावेजों पर तंत्री के हस्ताक्षर नहीं हैं। वहीं, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि एसआईटी को स्पष्ट करना चाहिए कि तंत्री को 41 दिन जेल में क्यों रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जांच CPI(M) नेताओं तक पहुंच रही थी, तब मुख्यमंत्री कार्यालय ने हस्तक्षेप किया। हालांकि सतीशन ने यह भी कहा कि वह तंत्री को निर्दोष नहीं मानते, लेकिन गिरफ्तारी का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
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