खरगे के आवास पर सजी मॉक संसद, मीरा कुमार ने संभाली अध्यक्षता; विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरा

HIGHLIGHTS
- खरगे ने कहा कि विपक्ष के 193 सांसदों का पहले दिया गया नोटिस खारिज कर दिया गया था।
- मीरा कुमार ने बताया कि राज्यसभा में प्रस्ताव मल्लिकार्जुन खरगे पेश करेंगे।
- विपक्ष ने फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दे उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित मॉक संसद का नजारा संसद की कार्यवाही जैसा दिखाई दिया। इसके प्रसारण की व्यवस्था भी संसद की तर्ज पर की गई थी। पहली पंक्ति में एक ओर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बैठे नजर आए, जबकि दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती मौजूद थीं। महबूबा मुफ्ती के पास तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और तेजस्वी यादव बैठे थे। प्रियंका गांधी दूसरी पंक्ति में कपिल सिब्बल के साथ नजर आईं।
मॉक संसद की पीठासीन अधिकारी लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को बनाया गया था। उन्होंने ही पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की शुरुआत भी संसद की तरह हुई और सबसे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने संबोधन दिया।
इस मॉक संसद में उन लोगों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। पीठासीन अधिकारी मीरा कुमार ने ऐसे लोगों को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया। इनमें सुशी अनीता जायसवाल भी शामिल थीं।
उन्होंने बताया कि वह कोलकाता से दिल्ली रहने आई थीं। वर्ष 2012 में दिल्ली में उनका पहचान पत्र बना और तब से वह लगातार मतदान कर रही हैं। उन्होंने खुद को सिंगल मदर बताते हुए सरकार से सवाल किया कि वह किस देश की नागरिक हैं, इसका प्रमाण सरकार दे। उन्होंने पूछा कि पहचान पत्र को मानने से इनकार करने का अधिकार किसने दिया। पश्चिम बंगाल के इफ्तिखार अहमद ने भी अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि उनका नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सीधे निर्देशों पर आयोग का संचालन कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि देश में लोगों के मतदान के अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कार्यक्रम में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष ने लगाए आरोप
खरगे ने कहा कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव दिया था। हालांकि, उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि संवैधानिक संस्था की गरिमा बनाए रखने का प्रयास है। खरगे के मुताबिक, विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्षता से काम करे और आम नागरिकों का भरोसा उस पर कायम रहे।
उन्होंने आशंका जताई कि कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के नाम कंप्यूटर के माध्यम से चुपचाप मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। खरगे ने कहा कि किसी भी नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मीरा कुमार ने महाभियोग प्रस्ताव पर दी जानकारी
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया है। यह प्रस्ताव राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से पेश किया जाएगा। इसके बाद खरगे इस मुद्दे पर अपना बयान भी देंगे।
मीरा कुमार ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एशिया, अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका के कई देश भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को एक मॉडल के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था चुनावों की ताकत पर आधारित है और इस प्रक्रिया में मतदाता की भूमिका सबसे अहम है।
उनके मुताबिक, यदि किसी एक मतदाता को भी वोट डालने से रोका जाता है तो यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। किसी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।
खरगे ने 2023 के कानून पर भी उठाए सवाल
खरगे ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों की खरीद-फरोख्त, राजनीतिक दलों में तोड़फोड़ और सरकारें गिराने के बाद अब वोटों की चोरी की जा रही है।
इस दौरान उन्होंने चुनावी बॉन्ड, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का भी उल्लेख किया। खरगे ने दावा किया कि वोटों की चोरी के सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों तथा कार्यकाल से जुड़े वर्ष 2023 के कानून को भी जिम्मेदार बताया।
उनके अनुसार, यह कानून दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित किए जाने के बाद पारित किया गया था। खरगे ने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच मिल गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी इस तरह का सुरक्षा कवच नहीं दिया गया है।
विपक्ष ने गिनाए छह आरोप
मॉक संसद के दौरान विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े छह प्रमुख आरोप गिनाए गए।
वोट चोरी की साजिश: विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनावों में हेरफेर करने की साजिश रची गई।
13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप: दावा किया गया कि मतदाता सूची से 13.2 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए।
संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव: विपक्ष का आरोप है कि संसद की अनुमति के बिना फॉर्म-6 के नियमों में संशोधन किया गया।
ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण: आरोप लगाया गया कि ईसीआईनेट के माध्यम से मतदाता सूचियों पर नियंत्रण किया गया।
दो अन्य चुनाव आयुक्तों को दरकिनार करने का आरोप: विपक्ष ने कहा कि आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों की भूमिका सीमित कर दी गई।
मोदी और शाह के इशारे पर काम करने का आरोप: विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।
खरगे ने अपना संबोधन समाप्त करने के बाद उन्हें पर्याप्त समय देने के लिए मीरा कुमार का आभार जताया। यह प्रक्रिया भी संसद की कार्यवाही की तरह रही। इसके बाद समाजवादी पार्टी के हरेंद्र सिंह मलिक और अन्य विपक्षी नेता अपनी बात रख रहे थे।
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