सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज बिक्री पर रोक बरकरार, गुजरात हाईकोर्ट ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई रोक

HIGHLIGHTS
- गुजरात सरकार ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दाखिल की थी।
- न्यायमूर्ति निशा ठाकोर ने होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की याचिकाओं पर सुनवाई की थी।
- जिला कलेक्टर ने 10 अगस्त 2026 को प्रतिबंध संबंधी अधिसूचना जारी की थी।
गुजरात: प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध के मामले में शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट में अहम घटनाक्रम हुआ। अदालत की एकल पीठ ने दिन में मंदिर के आसपास नॉनवेज खाने की बिक्री पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने इस फैसले पर रोक लगा दी। इसके साथ ही जिला कलेक्टर की ओर से लगाया गया प्रतिबंध फिलहाल बरकरार रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश मनाश रंजन पाठक और न्यायमूर्ति निरजार देसाई की खंडपीठ ने गुजरात सरकार की तत्काल अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 दिसंबर की तारीख तय की है।
एकल पीठ ने प्रतिबंध हटाने का दिया था आदेश
इससे पहले न्यायमूर्ति निशा ठाकोर ने सोमनाथ मंदिर के आसपास होटल और रेस्टोरेंट संचालित करने वाले कारोबारियों की याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने जिला कलेक्टर की ओर से जारी प्रतिबंध संबंधी अधिसूचना रद्द कर दी थी।
एकल पीठ के इस फैसले के बाद गुजरात सरकार ने तुरंत खंडपीठ में अपील दाखिल की। सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दो जजों की पीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
मंदिर के 500 मीटर के दायरे में प्रतिबंध
जिला कलेक्टर ने 10 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में मांसाहारी भोजन बनाने, रखने और बेचने पर रोक लगाई गई थी।
यह प्रतिबंध क्षेत्र के छह तय मार्गों पर भी लागू किया गया था। ये रास्ते इलाके के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ते हैं और पवित्र सोमनाथ तीर्थ यात्रा सर्किट का हिस्सा हैं। इन मार्गों पर भी नॉनवेज भोजन की बिक्री प्रतिबंधित की गई थी।
होटल संचालकों और सरकार ने रखीं अपनी दलीलें
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने अपनी याचिकाओं में प्रतिबंध को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था। उनका कहना था कि उन्हें कानूनी तरीके से कारोबार करने और आजीविका कमाने का अधिकार है।
वहीं, राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि संविधान के तहत व्यापार करने की स्वतंत्रता का यह अर्थ नहीं है कि किसी भी जगह हर प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की इजाजत दी जाए। सरकार के अनुसार, किसी स्थान के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। सरकार ने कहा कि सोमनाथ सामान्य व्यावसायिक शहर नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
26 दिसंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज भोजन तैयार करने, रखने और बेचने पर प्रतिबंध जारी रहेगा। अब इस मामले में 26 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें अदालत संबंधित पक्षों की दलीलों पर आगे विचार करेगी।
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