एयरलाइंस में नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड समेत 6 गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- फर्जी वेबसाइट के जरिए युवाओं को नौकरी का झांसा दिया जाता था।
- गिरोह एडमिशन और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 7 से 10 हजार रुपये वसूलता था।
- पुलिस ने दो लैपटॉप, आठ मोबाइल और आठ सिम कार्ड बरामद किए।
नई दिल्ली। मध्य जिला साइबर थाना पुलिस ने एयरलाइंस कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी वेबसाइट तैयार कर खुद को ब्रिटिश एयरवेज और फ्यूचर विंग्स लर्निंग इंस्टीट्यूट से जुड़ा बताते थे। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से एडमिशन और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर सात से दस हजार रुपये वसूले जाते थे।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान ग्रेटर नोएडा निवासी मास्टरमाइंड संदीप कुमार, मुरादाबाद निवासी उसके पार्टनर अखिल कुमार, गाजियाबाद निवासी वेबसाइट डेवलपर राकेश कुमार और तीन टेली-कॉलर सपना, श्वेता व साक्षी के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से दो लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड और नौकरी तलाशने वालों का डाटा रखने वाले दो रजिस्टर बरामद किए हैं। जांच में नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से संबंधित नौ शिकायतें भी सामने आई हैं।
इंस्टाग्राम पर देखा था आईजीआई एयरपोर्ट में नौकरी का विज्ञापन
जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजवीर सिंह के मुताबिक, एक शिकायतकर्ता ने साइबर थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि 10 जून को इंस्टाग्राम पर दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट में नौकरी का विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में ब्रिटिश एयरवेज के नाम का इस्तेमाल किया गया था। विज्ञापन में अपनी जानकारी भरने के बाद शिकायतकर्ता के पास एक महिला का फोन आया, जिसने खुद को एयरलाइन की मैनेजर बताया।
महिला ने वाट्सऐप के जरिए पीड़ित से पैन, आधार कार्ड, मार्कशीट और बायोडाटा लिया। इसके बाद उसे बताया गया कि एयरपोर्ट पर नौकरी पाने के लिए फ्यूचर विंग्स लर्निंग इंस्टीट्यूट से एविएशन मैनेजमेंट में डिप्लोमा करना जरूरी है। इसी बहाने उससे यूपीआई के जरिए सात हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
फर्जी एडमिशन स्लिप और जॉब ऑफर लेटर भेजा
इसके बाद पीड़ित को फर्जी एडमिशन स्लिप, एनओसी और जॉब ऑफर लेटर भेजा गया। बाद में उसे पता चला कि ब्रिटिश एयरवेज के नाम पर किया गया दावा फर्जी था। पुलिस ने जांच के दौरान यूपीआई और बैंक खातों में हुए पैसों के लेनदेन के साथ वेबसाइट के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी जुटाई।
इसी जांच के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। 18 अगस्त को नोएडा से संदीप कुमार और अखिल कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरोह से जुड़े वेबसाइट डेवलपर राकेश कुमार और तीन महिला टेली-कॉलर्स को भी गिरफ्तार कर लिया।
फर्जी कंपनियों में काम करने के दौरान सीखा ठगी का तरीका
पुलिस अधिकारी के अनुसार, मास्टरमाइंड संदीप कुमार पहले एविएशन जॉब देने वाली फर्जी कंपनियों में टेली-कॉलर के तौर पर काम कर चुका था। वहीं उसने नौकरी के नाम पर ठगी करने का तरीका सीखा। इसके बाद उसने अपना फर्जी कारोबार शुरू किया।
संदीप ने अखिल कुमार के साथ 50-50 की साझेदारी में नोएडा के गौर सिटी सेंटर मॉल में कार्यालय लिया। यहां ब्रिटिश एयरवेज और फ्यूचर विंग्स लर्निंग इंस्टीट्यूट के नाम से काम शुरू किया गया।
ऑनलाइन जॉब पोर्टल से खरीदते थे युवाओं का डाटा
पुलिस के मुताबिक, गिरोह ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी तलाशने वाले लोगों का डाटा खरीदता था। इसके बाद महिला टेली-कॉलर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से संपर्क करती थीं।
फोन पर उन्हें एयरपोर्ट या एविएशन सेक्टर में नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद ऑनलाइन कोर्स या डिप्लोमा के नाम पर सात से दस हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा जाता था।
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