बठिंडा: डीसी कार्यालय घेरने पहुंचे किसानों को पुलिस ने रोका, स्थिति तनावपूर्ण

HIGHLIGHTS
- भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना देने के प्रयास के दौरान बुधवार को बठिंडा जिले में किसानों और पुलिस के बीच टकराव हो गया।
- पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
- जानकारी के अनुसार, जिउंद गांव के किसान डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का घेराव करने के लिए जुट रहे थे।
- जब प्रशासन को इसकी सूचना मिली, तो भारी पुलिस बल गांव के आस-पास तैनात कर दिया गया।
- इस दौरान कुछ किसानों को मामूली चोटें भी आईं।
बठिंडा। भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना देने के प्रयास के दौरान बुधवार को बठिंडा जिले में किसानों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।
जानकारी के अनुसार, जिउंद गांव के किसान डिप्टी कमिश्नर कार्यालय का घेराव करने के लिए जुट रहे थे। जब प्रशासन को इसकी सूचना मिली, तो भारी पुलिस बल गांव के आस-पास तैनात कर दिया गया। इस दौरान कुछ किसानों को मामूली चोटें भी आईं।
किसान नेताओं ने बताया कि पिछले 11 महीनों से उनके साथी जेल में बंद हैं और उनकी रिहाई के लिए कई बार प्रशासन से अपील की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर किसान 18 फरवरी को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के सामने धरना देने का निर्णय लेकर पहुंचे।
पुलिस ने शहर में प्रवेश रोकने के लिए बठिंडा के सभी मुख्य मार्गों पर नाकाबंदी कर दी। जिले और पड़ोसी जिलों से 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। एसएसपी और डीआईजी भी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। रामपुरा के पास बठिंडा–चंडीगढ़ हाईवे पर भारी पुलिस फोर्स द्वारा बेरिकेड लगाए गए हैं।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके घरों पर छापेमारी की और कई नेताओं को नजरबंद करने की कोशिश की। उगराहां के जिला प्रधान चरण सिंह नूरपुरा ने हालांकि पुलिस की निगरानी को चकमा देकर बठिंडा में अपने साथियों के साथ धरने में शामिल होने का कामयाब प्रयास किया।
किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनका उद्देश्य केवल जेल में बंद साथियों की रिहाई और किसानों के हितों की रक्षा है। वहीं पुलिस का कहना है कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और हिंसा की आशंका को रोकना है।
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