महिला आरक्षण मुद्दे पर राहुल गांधी आवास के बाहर भाजपा का प्रदर्शन, स्वराज समेत कई हिरासत में

HIGHLIGHTS
- संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
- इस मुद्दे पर भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन भी किया है।
- भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में दिल्ली में राहुल गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया।
- इस प्रदर्शन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद हेमा मालिनी, कमलजीत सहरावत, बांसुरी स्वराज और मनोज तिव…
नई दिल्ली। संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस मुद्दे पर भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन भी किया है।
भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में दिल्ली में राहुल गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया और विपक्ष पर महिला विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया। इस प्रदर्शन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद हेमा मालिनी, कमलजीत सहरावत, बांसुरी स्वराज और मनोज तिवारी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
भाजपा का विपक्ष पर हमला
भाजपा नेताओं ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बाधा पहुंचाई है। पार्टी का आरोप है कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन विपक्ष ने इसे अपने राजनीतिक हितों के कारण रोक दिया।
भाजपा ने विपक्ष पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि वह केवल वोट बैंक की राजनीति करता है और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछले तीन दशकों से देश की आधी आबादी लगातार उपेक्षा और अपमान का सामना कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण से जुड़े प्रयासों को कभी फाड़ा गया, कभी रोका गया और कभी अलग-अलग बहानों से टाल दिया गया।
उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि जब तीन तलाक जैसे मुद्दे पर कानून लाया गया तो उसका विरोध क्यों किया गया।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने हेतु एक निष्पक्ष व्यवस्था की आवश्यकता है और 2026 में प्रस्तावित परिसीमन को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
वहीं सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि विपक्ष का विरोध केवल राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं और वास्तविक भागीदारी देने से बचते हैं।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और महिला आरक्षण मुद्दा एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिख रहा है।
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