बच्चों में समय से पहले यौवन के बढ़े मामले, रोहतक PGI में हर महीने 6 नए मरीज

HIGHLIGHTS
- पीजीआई में फिलहाल करीब 40 बच्चे हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन ले रहे हैं।
- हरियाणा के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
- समय पर इलाज न मिलने से बच्चों की लंबाई प्रभावित होने का खतरा बताया गया है।
रोहतक। मासूम बच्चों में सामान्य उम्र से पहले यौवन के लक्षण दिखाई देने के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहे हैं। पीजीआई रोहतक में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां चार साल की बच्चियों में माहवारी शुरू हो रही है, जबकि पांच साल के बच्चे के चेहरे पर मुंहासे दिखाई दे रहे हैं। पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक में ऐसे बच्चों का विशेष इंजेक्शन के माध्यम से इलाज कर हार्मोन की गति को नियंत्रित किया जा रहा है।
चिकित्सा की भाषा में लड़कियों में आठ वर्ष और लड़कों में नौ वर्ष की उम्र से पहले यौवन के लक्षण दिखाई देने को प्रीकोशियस प्यूबर्टी यानी असामयिक यौवनारंभ कहा जाता है।
हर महीने सामने आ रहे छह नए मामले, लड़कियों की संख्या अधिक
पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो. अंजलि वर्मा के अनुसार, क्लीनिक में हर महीने लगभग छह नए बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। वर्तमान में करीब 40 बच्चे हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लेने के लिए पीजीआई पहुंच रहे हैं। इनमें सिर्फ सात लड़के हैं।
हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। वर्ष 2019 में ऐसे मामलों की संख्या केवल दो से तीन थी। अब जागरूकता बढ़ने के कारण अधिक मामले सामने आने लगे हैं।
लीयूपरोलाइड इंजेक्शन से नियंत्रित किए जा रहे हार्मोन
डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि इस स्थिति में कम उम्र में ही दिमाग से सामान्य से अधिक हार्मोन निकलने लगते हैं। हार्मोन की इस गति को नियंत्रित करने के लिए बच्चों को हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन दिया जाता है। कुछ वर्षों तक मासिक इंजेक्शन देने के बाद 11 से 12 वर्ष की उम्र के आसपास इसे बंद कर दिया जाता है।
मोटापा और जंक फूड भी प्रमुख कारण
लड़कियों में समय से पहले यौवन आने के प्रमुख कारणों में मोटापा बताया गया है। इसके अलावा जंक फूड का सेवन, बढ़ता स्क्रीन टाइम, व्यायाम की कमी, ब्रेन ट्यूमर और उर्वरक युक्त खान-पान भी इसके बड़े कारणों में शामिल हैं। इससे बचाव के लिए रोजाना व्यायाम करने, स्क्रीन टाइम कम करने और जंक फूड से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
देरी से इलाज होने पर लंबाई पर पड़ता है असर
अभिभावकों के बच्चों को देर से अस्पताल लेकर पहुंचने के कारण उनकी लंबाई पर सबसे अधिक असर पड़ता है। ऐसे बच्चों की लंबाई कम रह सकती है। यदि समय रहते डॉक्टर से संपर्क किया जाए तो इसका सटीक समाधान संभव है।
समय से पहले यौवन के प्रमुख लक्षण
- आठ वर्ष की उम्र से पहले स्तनों का विकास होना।
- लड़कों के शरीर और जननांग पर कम उम्र में बाल आना।
चार साल की बच्ची में शुरू हुई थी पीरियड ब्लीडिंग
एक मामले में चार साल की बच्ची को पीरियड की ब्लीडिंग होने के बाद पीजीआई लाया गया। जांच में उसके हार्मोन सामान्य से काफी अधिक पाए गए। फिलहाल बच्ची का हर महीने इंजेक्शन के माध्यम से उपचार किया जा रहा है।
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