हार से हिम्मत नहीं टूटती, मराठी समाज के लिए संघर्ष जारी रखेंगे: राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने बीएमसी चुनावों के बाद मराठी समाज और मराठी पहचान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दुहराई है। उन्होंने कहा कि चाहे चुनाव परिणाम उनकी उम्मीदों के अनुरूप न रहे, उनका संघर्ष मराठी भाषा, मराठी लोगों और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए लगातार जारी रहेगा।
राज ठाकरे ने अपने संदेश में मनसे और शिवसेना के सभी निर्वाचित पार्षदों को बधाई दी और बताया कि यह चुनाव आसान नहीं था। उन्होंने इसे पैसों और सत्ता की ताकत के खिलाफ मराठी समाज की शक्ति की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
मराठी भाषा और पहचान के लिए संघर्ष जारी
राज ठाकरे ने स्वीकार किया कि पार्टी के प्रदर्शन में कमी रही, लेकिन जोर देकर कहा कि चुनाव हारने का मतलब यह नहीं कि हिम्मत हार जाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचित पार्षद मराठी समाज के हितों की रक्षा करेंगे और किसी भी प्रकार की अन्यायपूर्ण कार्रवाई का जवाब देंगे। राज ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में सत्ता में बैठे लोग और उनके समर्थक हमेशा मराठी लोगों को कमजोर करने की कोशिश करेंगे, इसलिए मनसे और मराठी समाज को एकजुट रहना होगा।
उन्होंने पार्टी और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया और कहा, “चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन हर सांस मराठी के लिए है। अब समय है फिर से काम शुरू करने और पार्टी को नई दिशा देने का।”
शिवसेना (यूबीटी) ने भी दी प्रतिक्रिया
उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने चुनावों में हार के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि महाराष्ट्र में मराठी समाज के लिए राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी समाज को उसका उचित हक और सम्मान नहीं मिलता।
मनसे का प्रदर्शन: बड़े शहरों में खाता भी नहीं खुला
बीएमसी चुनावों में मनसे का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल, वसई-विरार, उल्हास नगर, भिवंडी, नागपुर, सोलापुर, चंद्रपुर और जलगांव जैसे बड़े शहरों में मनसे को कोई भी सीट नहीं मिली। कुल मिलाकर मनसे को बीएमसी में केवल छह सीटें मिलीं, जबकि ठाणे, नवी मुंबई और नासिक में पार्टी ने 1-1 सीट जीतने में सफलता पाई। कल्याण में पार्टी केवल पांच सीटों तक सिमट गई।
याद रहे कि 20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव से पहले गठजोड़ किया था, लेकिन इस गठबंधन से मनसे को कोई खास लाभ नहीं मिला।
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