बारिश और तेज हवाएं भी नहीं दिला सकीं राहत, दिल्ली की हवा अब भी खराब; AQI 222 पर पहुंचा

HIGHLIGHTS
- 26 से 29 अक्तूबर के बीच दिल्ली के AQI में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।
- भिवाड़ी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 302 तक पहुंच गया।
- वेंटिलेशन इंडेक्स 3000 रहा, जो मानक से करीब 50 फीसदी कम है।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान अर्नब और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिल्ली-एनसीआर में बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में खास कमी नहीं आई। गुरुवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 222 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। हालांकि, बुधवार को दर्ज 229 के मुकाबले इसमें सात अंकों की मामूली गिरावट आई है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों तक हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहने की आशंका है।
गुरुवार तड़के से ही दिल्ली में घने बादल छाए रहे। कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक हुई और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। इसके बाद भी प्रदूषण से खास राहत नहीं मिली। आंकड़ों के मुताबिक, 26 अक्तूबर को दिल्ली का AQI 174 था, जो 27 अक्तूबर को बढ़कर 197 और 28 अक्तूबर को 229 हो गया। गुरुवार को इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई।
दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित रहे NCR के कई शहर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 29 अक्तूबर के आंकड़ों के मुताबिक, एनसीआर के कई शहरों में दिल्ली के मुकाबले प्रदूषण का स्तर अधिक रहा। राजस्थान के भिवाड़ी में AQI 302 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है। वहीं, बल्लभगढ़ में यह 274 और गुरुग्राम में 240 रहा।
नोएडा का AQI 222 और ग्रेटर नोएडा का 214 दर्ज किया गया। दूसरी ओर, गाजियाबाद में 147 और फरीदाबाद में 122 AQI रहा। इन दोनों शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से प्रदूषक कणों की निकासी प्रभावित
बारिश और तेज हवाएं प्रदूषण के कणों को कम करने में सहायक होती हैं, लेकिन मौसमी परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहने के कारण इसका अपेक्षित असर नहीं दिखाई दिया। IITM के अनुसार, वेंटिलेशन इंडेक्स 3000 दर्ज किया गया, जो मानक से करीब 50 फीसदी कम है। इसके चलते प्रदूषक कण वातावरण से प्रभावी तरीके से बाहर नहीं निकल सके।
पूर्वानुमान के मुताबिक, 30 और 31 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार होने की संभावना है। हालांकि, एक नवंबर से हवा की गुणवत्ता फिर खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई है।
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