बस कंडक्टर से जनजातीय कलाकार तक, 45 गुमनाम नायकों को पद्मश्री

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर से 45 ऐसे लोगों को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है, जिन्होंने बिना किसी प्रचार के समाज की सेवा को अपना जीवन बना लिया। इन गुमनाम नायकों में एक पूर्व बस कंडक्टर से लेकर एशिया का पहला मानव दूध बैंक शुरू करने वाली डॉक्टर और 90 वर्षीय आदिवासी वाद्य कलाकार तक शामिल हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय बनाने वाले अंके गौड़ा
कर्नाटक के मैसूर के पास हरलहल्ली गांव निवासी 75 वर्षीय अंके गौड़ा कभी बस कंडक्टर थे। उन्होंने अपने जुनून को मिशन बनाते हुए ‘पुस्तक माने’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा नि:शुल्क पुस्तकालय तैयार किया। यहां 20 से अधिक भाषाओं में करीब 20 लाख पुस्तकें और दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
एशिया का पहला मानव दूध बैंक शुरू करने वाली डॉक्टर
मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर्मिडा फर्नांडिस को भी पद्मश्री दिया जाएगा। उन्होंने एशिया का पहला मानव दूध बैंक स्थापित कर हजारों नवजात शिशुओं की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
विलुप्त होती कलाओं और परंपराओं को संजीवनी
इस सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो लुप्त होती लोक कलाओं, पारंपरिक युद्ध कलाओं और जनजातीय विरासत को बचाने में जुटे हैं।
मध्य प्रदेश के भगवानदास रैकवार बुंदेली युद्ध कला के प्रशिक्षक हैं, जबकि महाराष्ट्र के 90 वर्षीय भिकलिया लाडकिया धिंडा जनजातीय तरपा वाद्य के कलाकार हैं।
जम्मू-कश्मीर के समाजसेवी बृज लाल भट्ट को भी उनके सामाजिक योगदान के लिए चुना गया है।
शिक्षा, साहित्य और विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल खोलने वाली बुधरी ताती
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ओडिशा के संथाली लेखक व संगीतकार चरण हेम्ब्रम
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मुरादाबाद के पीतल नक्काशी शिल्पकार चिरंजी लाल यादव
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गुजरात की ‘मानभट्ट’ लोककला के कलाकार धार्मिक लाल चुन्नीलाल पांड्या
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हैदराबाद के आनुवंशिकी वैज्ञानिक डॉ. कुमारस्वामी थंगराज, जिन्होंने मानव प्रवास पर ऐतिहासिक शोध किया
हथियार आधारित तमिल युद्ध कला को मिला सम्मान
पुडुचेरी के के. पाजनिवेल को प्राचीन तमिल हथियार आधारित युद्ध कला ‘सिलंबम’ के संरक्षण और प्रचार के लिए पद्मश्री के लिए चुना गया है।
वहीं, 60 वर्षों से हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में योगदान दे रहे कैलाश चंद्र पंत को भी सम्मान मिलेगा।
हरियाणा के खेमराज सुंदरियाल को पारंपरिक वस्त्र बुनाई तकनीकों (टेपेस्ट्री और जामदानी) को बचाने और कारीगरों को प्रशिक्षण देने के लिए चुना गया है।
समाज के हर कोने से चुने गए असली नायक
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष पद्मश्री सूची में ऐसे लोग शामिल किए गए हैं, जिन्होंने सीमावर्ती इलाकों, जनजातीय समाज, दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के लिए निस्वार्थ सेवा की है। इन सभी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लिया।
इन गुमनाम नायकों को चुना गया पद्मश्री के लिए चुना गया-
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