जस्टिस यशवंत वर्मा कल लोकसभा समिति के सामने होंगे पेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को 12 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित जांच समिति के समक्ष पेश होना होगा। इससे पहले उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में समिति के सामने उपस्थित होने की तय समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। ऐसे में अब जस्टिस वर्मा को निर्धारित तारीख पर समिति के सामने पेश होना अनिवार्य होगा।
इस मामले में 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही संसदीय समिति की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके दायित्व निभा सकते हैं, तो फिर राज्यसभा के सभापति की गैरमौजूदगी में उपसभापति उनके अधिकारों का प्रयोग क्यों नहीं कर सकते।
दलील से सहमत नहीं हुआ शीर्ष अदालत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की उस दलील को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्यसभा के उपसभापति को किसी महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार नहीं है। जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम में उपसभापति को महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार नहीं दिया गया है और यह अधिकार केवल लोकसभा अध्यक्ष तथा राज्यसभा के सभापति के पास है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 14 और 15 मार्च 2025 की दरम्यानी रात जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने की घटना सामने आई थी। आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं, जिनके वीडियो बाद में सामने आए। घटना के समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी थी। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई। इस घटना के लगभग एक सप्ताह बाद जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।
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