मेरठ में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज, भैंसाली बस अड्डे के लिए भुगतान से पहले रिकॉर्ड जांच अनिवार्य

मेरठ। मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने भूमि अधिग्रहण और सीधी खरीद से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि किसी भी परियोजना के लिए मुआवजा भुगतान से पहले संबंधित जमीनों का पूरा पुराना रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों का गहन सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।
इसी क्रम में भैंसाली बस अड्डे को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। इस परियोजना के तहत करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा भुगतान प्रस्तावित है, जिसके लिए मंडलायुक्त की मंजूरी जरूरी है।
जानकारी के अनुसार, कमिश्नर ने इस फाइल पर 15 बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज करते हुए विस्तृत जवाब मांगा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी प्रश्नों का जवाब तैयार कर मंडलायुक्त कार्यालय को भेज दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही भुगतान की अनुमति मिल सकती है, जिसके बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भैंसाली बस अड्डे को जाम की समस्या कम करने के उद्देश्य से शहर के बाहर मोदीपुरम और भूडबराल क्षेत्र में शिफ्ट किया जा रहा है। वर्तमान में यहां से रोजाना 400 से अधिक बसें विभिन्न जिलों और राज्यों के लिए संचालित होती हैं, जो शहर के भीतर यातायात दबाव बढ़ाती हैं।
नई योजना के तहत भैंसाली बस अड्डे और वर्कशॉप की जमीन एनसीआरटीसी को रैपिड और मेट्रो रेल परियोजना के लिए हस्तांतरित की जा चुकी है। इसके चलते नए बस अड्डों का निर्माण एनसीआरटीसी की जिम्मेदारी में है।
जमीन रिकॉर्ड को लेकर सख्त जांच
मंडलायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि अधिग्रहण की जा रही जमीन का 12 साला और 1359 फसली रिकॉर्ड सहित सभी राजस्व अभिलेखों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भूमि सरकारी संपत्ति तो नहीं है।
जिला प्रशासन ने इस पर कार्रवाई करते हुए सरधना और सदर तहसील के लेखपालों से रिकॉर्ड मंगवाया और कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में भी जांच कराई। इसके साथ ही एसडीएम स्तर पर भौतिक सत्यापन भी कराया गया।
कमिश्नर ने मूल्य निर्धारण समिति की बैठक का कार्यवृत्त, भूमि पर किसी भी न्यायिक विवाद की स्थिति, पट्टे और विरासत वाली जमीन का विवरण तथा अनुसूचित जाति की भूमि के लिए वैधानिक अनुमति जैसी जानकारियां भी तलब की थीं।
प्रशासन ने सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर भेज दी है।
अधिग्रहण का विवरण
इस परियोजना के तहत 79 भू-स्वामियों की कुल 39,930 वर्ग मीटर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इसमें भूडबराल, सिवाया, पल्हैड़ा और दुल्हैड़ा गांवों की जमीन शामिल है।
जिलाधिकारी का बयान
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सभी आपत्तियों का जवाब भेज दिया गया है। जैसे ही मंडलायुक्त से अनुमति मिलती है, मुआवजा भुगतान कर भूमि पर कब्जा लेकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
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