मुजफ्फरनगर बॉर्डर पर DJ कांवड़ों की सख्त स्क्रीनिंग, मानक पूरे होने पर ही मिल रही एंट्री

HIGHLIGHTS
- पुरकाजी बॉर्डर पर हर डीजे कांवड़ की माप और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
- मानकों से बड़ी मिली कश्यप डीजे कांवड़ पर 50 हजार रुपये का चालान किया गया।
- हरिद्वार और मुजफ्फरनगर पुलिस संयुक्त रूप से जांच अभियान चला रही है।
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा अब अपने सबसे व्यस्त दौर में पहुंच गई है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों शिवभक्त मुजफ्फरनगर के रास्ते अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इसी बीच हाईटेक और बड़ी डीजे कांवड़ों का जत्था भी उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर रहा है।
इस बार पुलिस बिना जांच के किसी भी डीजे कांवड़ को आगे जाने की अनुमति नहीं दे रही है। उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित पुरकाजी बॉर्डर डीजे कांवड़ों की जांच का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां हर डीजे कांवड़ की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई की जांच की जा रही है।
शासन की गाइडलाइन के अनुसार डीजे कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट निर्धारित की गई है। जो डीजे कांवड़ इन तय मानकों को पूरा कर रही हैं, उन्हें ही आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मौके पर ही कार्रवाई की जा रही है। रविवार रात कश्यप डीजे कांवड़ निर्धारित मानकों से अधिक बड़ी पाई गई, जिसके बाद उसका 50 हजार रुपये का चालान किया गया। इसके बाद मानकों के अनुसार संशोधन कराने पर ही उसे आगे जाने दिया गया।
वहीं, कुछ शिवभक्तों और डीजे संचालकों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की गाइडलाइन के अनुसार ही अपने डीजे तैयार किए हैं। लेकिन उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग नियमों और जांच प्रक्रिया के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि कई डीजे कांवड़ बॉर्डर पर घंटों से खड़ी हैं, जिससे यात्रा की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत हरिद्वार पुलिस और मुजफ्फरनगर पुलिस मिलकर डीजे कांवड़ों की जांच कर रही हैं। केवल उन्हीं डीजे कांवड़ों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है, जो निर्धारित ऊंचाई, चौड़ाई और सुरक्षा मानकों का पालन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य श्रद्धालुओं को परेशान करना नहीं, बल्कि लाखों शिवभक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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