पंचायत चुनाव मामला: हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सुक्खू सरकार

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई है और इसके लिए स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कुछ आपत्तियां भी जताईं।
हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 30 अप्रैल तक संपन्न कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को संविधान के प्रावधानों का पालन करने और पंचायती राज संस्थाओं के पांच साल के कार्यकाल के समाप्त होने से पहले चुनाव कराना अनिवार्य बताया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी आदेश संविधान की प्राथमिकता को प्रभावित नहीं कर सकते।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में तर्क दे सकती है कि पंचायत चुनाव राज्य के पंचायती राज अधिनियम के तहत होने हैं, जबकि आपदा अधिनियम केंद्रीय कानून है और फिलहाल राज्य में लागू है।
इस पर भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि एसएलपी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह 'सरकार बनाम सरकार' की स्थिति है। उन्होंने याचिका और प्रतिवादियों की सूची का हवाला देते हुए अपने विचार साझा किए।
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