विजयादशमी समारोह में जगदीप धनखड़ को न्योते पर सियासत, कांग्रेस ने उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- संघ के शताब्दी वर्ष के समापन के साथ विजयादशमी समारोह आयोजित होगा।
- कार्यक्रम में मोहन भागवत मुख्य संबोधन देंगे।
- भारत में इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच भी अतिथियों में शामिल हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का वार्षिक विजयादशमी समारोह अक्सर किसी न किसी वजह से चर्चा में रहता है। पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर सुर्खियां बनी थीं। इस बार पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को मिले निमंत्रण ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इसे भाजपा और संघ के बीच मतभेद के तौर पर पेश कर रही है, जबकि भाजपा ने इस पर चुप्पी साध रखी है। खास बात यह है कि धनखड़ इस बार समारोह के मुख्य अतिथि नहीं हैं।
इस वर्ष का विजयादशमी उत्सव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके साथ संघ के शताब्दी वर्ष का समापन समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में परंपरा के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत मुख्य संबोधन देंगे। अतिथियों में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और भारत में इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच शामिल हैं।
धनखड़ को न्योते पर क्यों हो रही चर्चा?
उपराष्ट्रपति रहते हुए राज्यसभा की कार्यवाही संचालित करने और सार्वजनिक जीवन में न्यायपालिका पर सीधे सवाल उठाने के लिए चर्चा में रहे धनखड़ ने 2018 में राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
सरकार और धनखड़ के बीच तनाव उस समय बढ़ गया, जब हाईकोर्ट के जज यशवंत शर्मा के घर से अधजले नोट मिलने के मामले में उन्होंने बिना परामर्श किए विपक्ष के महाभियोग नोटिस को स्वीकार कर लिया। विवाद की वजह यह थी कि सरकार इस पहल की अगुवाई खुद करना चाहती थी। इसके बाद अचानक धनखड़ के इस्तीफे की खबर सामने आई।
कांग्रेस ने संघ और भाजपा के संबंधों पर उठाए सवाल
जगदीप धनखड़ को समारोह में आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा और संघ के बीच मतभेद होने का दावा किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस निमंत्रण से दोनों के बीच चल रहे अंतर्विरोध सामने आए हैं।
रमेश ने यह भी कहा कि इस्तीफे के बाद धनखड़ के सरकारी आवास से जुड़े अधिकारों की मोदी सरकार ने अनदेखी की, जबकि इसी दौरान संघ ने उन्हें विजयादशमी समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है।
संघ ने क्या दी सफाई?
भाजपा ने इस मामले को संघ का आंतरिक विषय बताया है। वहीं, संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि विजयादशमी समारोह में हर साल अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोग अतिथि के रूप में शामिल होते हैं। संघ उन्हें कार्यक्रम में आने और संगठन को करीब से समझने का अवसर देता है।
पदाधिकारी ने उदाहरण देते हुए कहा कि संघ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी मुख्य अतिथि बनाया था, जबकि वह जीवनभर कांग्रेस से जुड़े रहे। धनखड़ को आमंत्रित किए जाने पर उन्होंने सवाल किया कि पद से इस्तीफा देने के बाद क्या धनखड़ ने सरकार या हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ कोई कदम उठाया है?
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