राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के खिलाफ

केरल में किसानों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कड़ी आलोचना का निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि भारत तभी प्रगति कर सकता है जब किसानों का सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
किसानों की नींव पर हमला
कन्नूर जिले के पेरावूर में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि किसान भारत की नींव हैं। उन्होंने कहा, "आईटी और अन्य क्षेत्रों की चर्चा जितनी भी लंबी हो, अगर किसान और कृषि का सम्मान नहीं किया गया तो कुछ भी टिकाऊ नहीं बन सकता। हम रोज़ भोजन करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि इसे हमारे खाने की मेज तक कौन पहुँचाता है।"
गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ ऐसा समझौता किया है, जो भारतीय कृषि की नींव को कमजोर करने वाला है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान छोटे और कम मशीनीकृत हैं, जबकि अमेरिकी किसानों के पास बड़े खेत और उच्च मशीनीकरण है। अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार तक आसान पहुँच देने से भारतीय किसानों को नुकसान होगा।
अमेरिका की कथित धमकी और एपस्टीन फाइलें
राहुल गांधी ने कहा कि व्यापार समझौता चार महीने तक अटका हुआ था क्योंकि भारतीय सरकार अमेरिकी कंपनियों के लिए कृषि क्षेत्र खोलने के पक्ष में नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को दबाव और धमकियों का सामना कराया।
गांधी ने बताया कि संसद में उन्होंने दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने की कोशिश की थी। पहला था एपस्टीन की 35 लाख फाइलों से जुड़ा मामला, जिसमें कथित तौर पर भारत के प्रधानमंत्री के बारे में संवेदनशील जानकारी मौजूद है। दूसरा मामला अदाणी समूह के खिलाफ अमेरिका में दर्ज कानूनी कार्रवाई से संबंधित था।
किसानों की बलि नहीं बनने देंगे
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के चलते भारतीय किसान व्यापार समझौते में बलि चढ़ाए जा रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री और भाजपा अपनी वित्तीय संरचना सुरक्षित रख सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न तो भारत के किसानों को और न ही केरल के किसानों को इस तरह की बलि बनने देगी।
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