कृति सेनन के समर्थन में राहुल गांधी, कंगना के बयान पर कहा- 'यह उसकी अपनी पसंद'

HIGHLIGHTS
- ज्वैलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन पर विवाद
- कंगना रनौत ने कृति के आउटफिट पर की टिप्पणी
- राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कृति का समर्थन किया
नई दिल्ली। एक ज्वैलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीति तक विवाद बढ़ गया है। विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन के पहनावे और पालतू कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य को लेकर शुरू हुए विवाद में अब कई राजनेता भी शामिल हो गए हैं।
एक ओर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कृति सेनन के पहनावे पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृति का समर्थन किया है।
कृति सेनन के समर्थन में राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कृति सेनन का समर्थन करते हुए उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी अपने अकाउंट पर शेयर की। राहुल गांधी ने लिखा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी अपनी पसंद है। उन्होंने अपनी आजादी का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को ट्रोल नहीं करने की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने 'Smash the Patriarchy' यानी 'पितृसत्ता को खत्म करो' हैशटैग का भी इस्तेमाल किया।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है और असली जनमुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
कंगना रनौत ने कसा तंज
बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बिना नाम लिए कृति सेनन के आउटफिट पर टिप्पणी की।
कंगना ने लिखा कि आज की महिला के पास कॉकटेल ड्रेस, साड़ी, जींस से लेकर सलवार-कमीज तक कई विकल्प हैं। ऐसे में वह बिकिनी या अंडरगारमेंट्स जैसे परिधान में अपने भाई को राखी क्यों बांधेगी? उन्होंने कहा कि यह विज्ञापन जानबूझकर असहज करने वाला बनाया गया लगता है।
कृति सेनन ने दिया जवाब
ट्रोलिंग और आलोचनाओं के बाद कृति सेनन ने सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि महिलाओं को यह बताना कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए? उनके मुताबिक संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, किसी कपड़े की नेकलाइन में नहीं।
रक्षाबंधन के महत्व पर बात करते हुए कृति ने कहा कि यह सुरक्षा का बंधन है। वह और उनकी बहन एक-दूसरे के साथ-साथ अपने पालतू कुत्ते को भी परिवार का हिस्सा मानकर राखी बांधती हैं। उन्होंने कहा कि त्योहार का सार भावनाओं में है, न कि पहने गए कपड़ों में।
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